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मुलायम ने भी बहू को समझाया फिर भी नहीं मानीं अपर्णा यादव, कहा- राष्ट्र के लिए ही लिया फैसला

लखनऊ. मुहावरा है कि ‘सौ सुनार की एक लोहार की’। भारतीय जनता पार्टी ने अपर्णा यादव भाजपा में शामिल करा समाजवादी पार्टी को कुछ ऐसा ही संदेश दिया है। तीन कैबिनेट मंत्रियों सहित एक दर्जन से अधिक बीजेपी विधायकों के सपा में शामिल होने के बाद से ही भाजपा बड़ा पलटवार करने की तैयारी में थी। आखिरकार, भाजपा यादव परिवार में सेंध लगाने में कामयाब रही और बुधवार को मुलायम सिंह यादव की ही पुत्रवधू अपर्णा यादव को भगवा टोली में ले आई। अपर्णा यादव मुलायम की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बेटे प्रतीक यादव की पत्नी हैं। राजनीतिक और सामाजिक तौर पर वह काफी सक्रिय हैं। चर्चा है कि अपर्णा यादव को अभी टिकट नहीं मिला तो भाजपा उन्हें संगठन में अहम पद दे सकती है। बाद में एमएलसी बनाकर उन्हें उच्च सदन में भेज सकती है। बीजेपी में टिकट के सवाल पर अपर्णा यादव ने कहा कि वह किसी शर्त पर बीजेपी में नहीं आई हैं। आगे पार्टी जो भी जिम्मेदारी तय करेगी वह उसे निभाएंगी। इस मौके पर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अखिलेश यादव पर तंज भी कसा और कहा कि वह अपना परिवार नहीं संभाल पा रहे हैं तो प्रदेश क्या संभालेंगे?

भारतीय जनता पार्टी में शामिल होते ही अपर्णा यादव ने कहा कि मैंने हमेशा राष्ट्र को धर्म माना है। राष्ट्र के लिए ही फैसला लिया है। यह मेरी नई पारी है। मैं अब राष्ट्र की आराधना करने निकली हूं, जिसमें मुझे सबका सहयोग चाहिए। मैं पीएम मोदी, सीएम योगी से बहुत प्रभावित हूं। पिछले पांच सालों में जिस तरह से प्रदेश में सीएम योगी ने काम किया है, जितनी स्कीम आई हैं वह प्रभावशाली है। इसलिए मैंने बीजेपी ज्वॉइन की। 2022 में यूपी में भाजपा की ही सरकार बनेगी।

मुलायम ने समझाया, पर नहीं मानीं अपर्णा
अखिलेश यादव ने अपर्णा के बीजेपी में शामिल होने को समाजवादी विचारधारा का विस्तार बताया। कहा कि “हमें खुशी इस बात की है कि समाजवादी विचारधारा का विस्तार हो रहा है। मुझे उम्मीद है कि हमारी विचारधारा वहां भी पहुंचेगी तो संविधान और लोकतंत्र को बचाने का काम होगा।” कहा कि नेताजी (मुलायम सिंह यादव) ने उन्हें काफी समझाया था लेकिन वह नहीं मानीं। वहीं, शिवपाल यादव ने कहा कि अपर्णा को मैंने भी नसीहत दी थी कि पहले पार्टी के लिए काम करो, लेकिन पहले से ही उनका झुकाव भाजपा की तरफ था। अपर्णा यादव मुलायम सिंह से ज्यादा शिवपाल यादव की करीबी माना जाती रही हैं। परिवार की लड़ाई में भी उनका झुकाव शिवपाल यादव की ओर ही था। लेकिन, शिवपाल यादव ने भी उन्हें पार्टी में रहकर काम करने की सलाह दी थी। वहीं, अपर्णा यादव ने यह कहकर सबको चौंका दिया कि वह मुलायम सिंह यादव का आशीर्वाद लेकर आई हैं।

पार्टी लाइन से हटकर करती थीं बयानबाजी
समाजवादी पार्टी के विरोध के इतर अपर्णा यादव ने सीएए कानून का समर्थन किया था। इतना ही नहीं पार्टी लाइन से हटकर अपर्णा अक्सर सार्वजनिक मंचों से मोदी और योगी सरकार की तारीफ करती रही हैं। ब्रिटेन की मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी से इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में मास्टर्स की डिग्री हासिल करने वाली अपर्णा यादव ने 2017 का विधानसभा चुनाव लखनऊ की कैंट विधानसभा सीट से लड़ा था, तब वह भाजपा की प्रत्याशी रीता बहुगुणा जोशी से हार गईं थीं। हार के बाद अपर्णा यादव ने कहा था कि उन्हें ईवीएम ने नहीं, परिवार ने हराया है। रीता बहुगुणा जोशी के सांसद बनने के बाद जब कैंट सीट रिक्त हो गई थी। उपचुनाव में सपा ने अपर्णा के बजाय मेजर आशीष चतुर्वेदी को टिकट दिया था। जबकि अपर्णा को टिकट का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। इसके बाद से ही वह नाराज बताई जा रही थीं। 2022 में भी टिकट मांग रही थीं। नहीं सुनवाई हुई तो उन्होंने भाजपा में शामिल होने का फैसला कर लिया।

मुलायम के समधी व साढ़ू भी भाजपा में गये
अपर्णा ही नहीं बुधवार को मुलायम सिंह यादव के साढ़ू व पूर्व विधायक प्रमोद गुप्ता भी बीजेपी में शामिल हो गये। औरैया जिले की बिधूना सीट से टिकट के दावेदार माने जा रहे थे, लेकिन बीजेपी के मौजूदा विधायक विनय शाक्य के सपा में आने के बाद उन्होंने अब बीजेपी में जाने का फैसला किया है। बीते दिनों मुलायम समधी व सिरसागंज सीट से विधायक हरिओम यादव भी बीजेपी में शामिल हुए थे। हरिओम यादव के भाई रामप्रकाश उर्फ नेहरू की बेटी की शादी मुलायम सिंह के भतीजे रणवीर सिंह से हुई है। वहीं पंचायत चुनाव के दौरान मुलायम के भाई अभयराम यादव की बेटी व पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव की बहन संध्या यादव ने पंचायत चुनाव के दौरान बीजेपी का दामन थामा था। संध्या यादव और उनके पति अनुजेश प्रताप यादव दोनों बीजेपी में हैं।