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Presidential Elections 2022 – द्रौपदी मुर्मू और यशवंत सिन्हा कौन हैं, इन्हें राष्ट्रपति बनाने के क्या है राजनीतिक मायने

लखनऊ. Presidential Elections 2022 – 18 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति पद के लिए सत्ता पक्ष भाजपा (BJP) ने मंगलवार को झारखंड की पूर्व राज्यपाल(Jharkhand Governor) और आदिवासी (Adivasi) नेता द्रौपदी मुर्मू और कांग्रेस (Congress), एनसीपी (NCP) और टीएमसी (TMC) सहित विपक्षी दलों ने पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा (Yashwant Sinha) को अपना उम्मीदवार चुना। 2017 के राष्ट्रपति चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) ने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में तत्कालीन बिहार के राज्यपाल (Bihar Governor) रामनाथ कोविंद (Ramnath Kovind) को मैदान में उतारा था और जीत भी हासिल की| आइये जानते हैं इस बार के दोनों उम्मीदवारों के बारे में और उनके जीत के मायने –

द्रौपदी मुर्मू कौन हैं? (Who is Draupadi Murmu)
ओडिशा में जन्मी 64 वर्षीय द्रौपदी मुर्मू 18 मई, 2015 को झारखंड के राज्यपाल के रूप में शपथ लेने से पहले दो बार विधायक और एक बार ओडिशा में मंत्री के रूप में कार्य किया था। राज्यपाल के तौर पर इनका कार्यकाल न केवल अविवादित रहा बल्कि यादगार भी रहा था| में हालाँकि 2017 के राष्ट्रपति चुनावों के दौरान इस पद के लिए द्रौपदी मुर्मू पर भी विचार किया गया था। मुर्मू देश के सबसे बड़े आदिवासी समुदाय संथाल (Santhal) से हैं| इन्होने अपना सारा जीवन समाजसेवा, गरीबों,बेसहारा और वंचितों को सशक्त करने में व्यतीत किया| मुर्मू ने अपने राजनीतिक जीवन (Political Career of Draupadi Murmu) की शुरुआत 1997 में की थी। वह 1997 में रायरंगपुर में जिला बोर्ड की पार्षद चुनी गईं। राजनीति में आने से पहले, मुर्मू ने श्री अरबिंदो इंटीग्रल एजुकेशन एंड रिसर्च, रायरंगपुर (Rairangpur) में मानद सहायक शिक्षक और सिंचाई में एक जूनियर असिस्टेंट के रूप में काम किया। जब भाजपा बीजू जनता दल (BJD) के साथ गठबंधन में थी, तब इन्होने नवीन पटनायक (Naveen Patnaik) सरकार में मंत्री के रूप में काम किया|

मुर्मू को ओडिशा विधान सभा (Orissa Legislative Assembly) द्वारा सर्वश्रेष्ठ विधायक के लिए नीलकंठ पुरस्कार(Neelkanth Award) से भी सम्मानित किया गया था।

द्रौपदी मुर्मू ही एनडीए कैंडिडेट क्यों?
संसदीय बोर्ड की बैठक में संवाददताओं को सम्बोधित करते हुए जेपी नड्डा (JP Nadda) ने बताया की सदस्य संसदीय बोर्ड की बैठक में शामिल हुए. बैठक के बाद संवाददाताओं को संबोधित करते हुए नड्डा ने कहा कि राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को लेकर 20 नामों पर चर्चा की गई और अंतत: इस बात पर सहमति बनी कि इस संवैधानिक पद के लिए देश के पूर्वी इलाके से किसी महिला को प्रत्याशी बनाना चाहिए| उन्होंने बताया कि चूंकि आज तक कोई आदिवासी राष्ट्रपति के रूप में नहीं आया है इसलिए राजग ने द्रौपदी मुर्मू को अपना उम्मीदवार बनाने का फैसला किया है| गुजरात, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा ने द्रौपदी मुर्मू पर दांव लगाया है। इन राज्यों में खासकर छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में आदिवासी बड़ी तादाद में हैं।

यशवंत सिन्हा कौन हैं? (Who is Yashwant Sinha)
पटना में जन्मे 84 वर्षीय सिन्हा पूर्व आईएएस (IAS) अधिकारी हैं और चार दशक से राजनीति में सक्रिय हैं| इन्होंने 1984 में 24 साल बाद प्रशासनिक सेवा (UPSC) छोड़ दी और जनता पार्टी में शामिल हो गए, जिसके नेता चंद्रशेखर (Chandrashekhar) उन्हें पसंद करते थे| समाजवादी विचारक चंद्रशेखर से लेकर भगवा दिग्गज लालकृष्ण आडवाणी (Lal krishna Advani) और वाजपेयी (Atal bihari Vajpayee) समेत कई अन्य सरकारों में मंत्री रह चुके हैं|1988 में राज्यसभा (Rajya Sabha) में इन्होने एंट्री ली। इन्होने बिहार के विपक्ष के नेता के तौर पर कमान संभाली और फिर 1998 में हजारीबाग से लोकसभा (Lok Sabha) चुनाव जीता| वह 2002 तक वित्त मंत्री (Finance Minister) रहे और फिर विदेश मंत्री (Foreign Minister) बने। यह हमेशा से ही अपने बयानों और कार्यों के चलते चर्चा का विषय बने रहे फिर चाहे 1989 में वीपी सिंह (VP Singh) सरकार के शपथ ग्रहण समारोह का बहिष्कार करना हो या फिर 2013 में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) के खिलाफ भ्रष्टाचार को लेकर बयानबाजी हो| 2014 में जब भाजपा ने लोकसभा टिकट पर इनके बजाय उनके बेटे जयंत सिन्हा (Jayant Sinha) को मैदान में उतारा, तो उन्होंने उन्हें शांत करने के लिए कुछ नहीं किया। जिसके चलते 2018 में भाजपा छोड़ दी और आरोप लगाया कि लोकतंत्र खतरे में है और 2021 में तृणमूल कांग्रेस (Trinmool Congress) में शामिल हो गए, पर अब इस्तीफा दे दिया है|

द्रौपदी मुर्मू की जीत के मायने? (Meaning of Draupadi Murmu victory)

  1. आज़ादी के बाद पैदा हुई पहली राष्ट्रपति बनेंगी
  2. ओडिशा से पहली बार देश को मिलेगा राष्ट्रपति
  3. सर्वोच्च पद पर पहुंचने वाली पहली आदिवासी महिला होंगी
  4. निर्वाचित होने पर मुर्मू भारत की पहली आदिवासी राष्ट्रपति और देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति बन जाएंगी।

वोटों का गणित ? (Presedential Elections Votes Calculation)
वोटों के गणित के हिसाब से वोट्स राजग पक्ष में है| क्यूंकि राजग (NDA) के करीब 50 फीसद मतों में ओडिशा सत्ताधारी बीजू जनता दल (BJD) के करीब 31,000 मत जुड़ गए हैं| कुछ और दल भी समर्थन का एलान कर सकते हैं| जिसके चलते राजनीतिक पंडितों का मानना यह है कि मुर्मू के यशवंत सिन्हा के खिलाफ चुने जाने की अधिक संभावना है, क्योंकि वह एक महिला हैं और एक विनम्र आदिवासी पृष्ठभूमि से आती हैं।

सिन्हा के पास करीब 3,70,709 वोट है| जिसमे से यूपीए (UPA) के 2,59,000, टीएमसी के 58,000, सपा (SP) के 28,688 और वाम दल के 25,000 वोट शामिल हैं|

चुनाव कब है और नतीजा कब आएगा? (Presedential Elections and Results)
राष्ट्रपति पद का चुनाव 18 जुलाई को और वोटों की गिनती 21 जुलाई को होगी|