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UP Elections 2022: यूपी में अब तक 231 सीटों पर मतदान, जानें- क्या कहता है अब तक का वोटिंग ट्रेंड

लखनऊ. UP Elections 2022- 403 विधानसभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश में अब तक 231 सीटों के लिए मतदान हो चुका है। अगले 12 दिनों में शेष बची 172 सीटों पर भी चुनाव संपन्न हो जाएगा। 27 फरवरी को अवध क्षेत्र के 10 जिलों की 60 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा। यूपी चुनाव के पहले चरण में 60.17 फीसदी, दूसरे चरण में 64.42 फीसदी, तीसरे चरण में 60.46 फीसदी और चौथे चरण में 61.52 फीसदी मतदान हुआ है। चुनावी नतीजे भले ही 10 मार्च को आएंगे, लेकिन सियासी गलियारों में अभी से हार-जीत का विश्लेषण शुरू हो गया है।

यूपी में अभी तक जिन 231 सीटों पर मतदान हुआ है, 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को इनमें से 191 सीटों पर जीत मिली थी। इस बार सत्तारुढ़ दल बीजेपी और समाजवादी पार्टी सहित सभी दल अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। राजनीतिक जानकार भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच कड़ा मुकाबला मान रहे हैं। लेकिन, अब तक बसपा को भी मजबूत मान रहे हैं। किसको कितनी सीटें? इस सवाल पर भले ही अलग-अलग राय हो, लेकिन सभी इस बात पर एकमत हैं कि 2022 में बीजेपी 2017 जैसा करिश्मा (312 सीट) नहीं कर पाएगी। लेकिन मतदाता के मन में क्या है? मतगणना के बाद ही यह पता चलेगा।

चौथे चरण में 61.52 फीसदी मतदान
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के चौथे चरण में 61.52 फीसदी मतदान हुआ है। 2017 में इन्हीं सीटों पर 62.55 फीसदी मतदान हुआ था, तब बीजेपी को 51 सीटों पर जीत मिली थी। पिछले चुनाव के मुकाबले एक फीसदी कम वोटिंग हुई है, लेकिन सिख, किसान बाहुल्य इलाकों में बंपर वोटिंग हुई है। इस चरण की 35 से अधिक सीटों पर ब्राह्मण मतदाता हार-जीत तय करने का माद्दा रखते हैं, जबकि कई क्षेत्रों में पासी (दलित) मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं। चौथे चरण की 59 सीटों पर पिछले तीन विधानसभा चुनावों के नतीजों का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि जब-जब वोट प्रतिशत बढ़ा, फायदा विपक्षी दलों को ही हुआ है। 2012 में 08 फीसदी मतदान बढ़ने पर सपा को 22 और 2017 में 05 फीसदी वोटिंग बढ़ने पर भाजपा को यहां 48 सीटों का फायदा हुआ था। 2007 में इन 59 सीटों पर 49.05 फीसदी, 2012 में 57.52 फीसदी और 2017 में 62.55 फीसदी वोट पड़े थे। 2007 में बसपा को सबसे अधिक 27, 2012 में सपा को 39 और 2017 में भाजपा को सबसे अधिक 51 सीटें मिली थीं। 2007 से 2017 तक जब-जब वोट प्रतिशत बढ़ा प्रमुख विपक्षी दल सत्ता में आई। लेकिन इस बार वोटिंग प्रतिशत भले ही थोड़ा कम है, सवर्ण इलाकों में कम वोटिंग से जरूर बीजेपी के माथे पर शिकन बढ़ गई है।

‘मिनी पंजाब’ में सबसे ज्यादा वोटिंग
लखीमपुर खीरी और पीलीभीत में सबसे अधिक सिख समुदाय के लोग रहते हैं, जिसके चलते इसे मिनी पंजाब कहा जाता है। चौथे चरण में सबसे ज्यादा वोटिंग पीलीभीत में 67.59 फीसदी और लखीमपुर खीरी में 66.32 फीसदी मतदान हुआ है। इसके अलावा सीतापुर में 62.66 फीसदी, हरदोई में 58.99 फीसदी, उन्नाव में 57.73 फीसदी, लखनऊ में 60.05 फीसदी, रायबरेली में 61.90 फीसदी, बांदा में 60.36 फीसदी, फतेहपुर में 60.07 फीसदी वोटिंग हुई है।

हर चरण के चुनाव में बदलते गये मुद्दे
10 फरवरी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ मतदान रुहेलखंड और बुंदेलखंड से होता हुआ अवध क्षेत्र में पहुंच गया है। पांचवें चरण के बाद यह पूर्वांचल में पहुंच जाएगा। ध्यान से देखें तो हर चरण में मुद्दों के साथ राजनीतिक दलों के स्ट्रैटजी भी बदलती रही है। दूसरे शब्दों में समझें तो गन्ना, जिन्ना, दंगा, हिजाब और आतंकवादी से होता चुनाव अब राम-बजरंगबली और गोमाता तक पहुंच चुका है।