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Cloud Burst: आखिर क्यों फटते हैं बादल? पल भर में मच जाती है तबाही

लखनऊ. Cloud Burst: अमरनाथ यात्रा (amarnath yatra) शुरू होते ही श्रद्धालुओं ने दर्शन के लिए अमरनाथ की यात्रा के लिए जाना शुरू कर दिया है| लेकिन 8 जुलाई को मिली सूचना के अनुसार अमरनाथ में तेज गर्जना के साथ आये सैलाब ने यात्रियों के बीच परेशानियां खड़ी कर दी हैं| यह 1996 के बाद से सबसे बड़ी त्रासदी मानी जा रही है| वहीं हिमाचल प्रदेश (himachal pradesh) में भी कुछ ऐसे ही नज़ारे देखने को मिले| आइये जानते हैं बादल फटने की वजह से जुड़े तथ्यों के बारे में-

बादल फटना क्या होता है? (what is cloud burst)
बादल फटना मतलब बादल के टुकड़े होने से नहीं है, बल्कि बादल फटना भारी बारिश होने के समय का एक हिस्सा है| बादल फटना एक टेक्निकल शब्द है – जिसे हम क्लाउड बर्स्ट या फ़्लैश फ्लड (cloud burst/flash flood) के नाम से जानते हैं| बादल फटने के समय बहुत ही कम समय में भारी मात्रा में यानी IMD के क्राइटेरिया के हिसाब से देखें तो अगर एक घंटे में 100MM बारिश होती है, और वह जमीन की सतह से 12 से 15 कि.मी की ऊंचाई पर होती है तो उसे बादल फटना कहते हैं|

लेकिन कभी-कभी एक ही स्थान पर एक से ज्यादा बादल फट जाते हैं, जैसे हमने उत्तराखंड में साल 2013 में देखा था|

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बादल क्या सिर्फ पहाड़ी क्षेत्र में फटते हैं? (Do clouds burst only in hilly areas)
सामान्य तौर पर बादल फटने की घटना पहाड़ी क्षेत्रों से ही आती है| वैज्ञानिकों के अनुसार बादल पहाड़ी क्षेत्रों में काफी ऊंचाई होने की वजह से फस जाते हैं| ऐसे में भारी मात्रा में नमी वाले बादल एक जगह एकट्ठा हो जाते हैं जिससे बादल की डेंसिटी बढ़ जाती है और फिर अचानक अत्यधिक तेज बारिश चालू हो जाती है|

बादल फटने का एक मामला मैदानी क्षेत्र महाराष्ट्र की राजधानी ‘मुंबई’ से भी 26 जुलाई 2005 में देखने को मिला है| जिससे यह धारणा तो बदल गयी की बादल मैदानी क्षेत्रों में नहीं फट सकते|

बादल फटने की वजह? (Cause of cloudburst)
बादल फटने की वजह काफी हद तक क्षेत्र की भौगोलिक और मौसमी परिस्थितियों पर निर्भर करता है| जैसे अगर जम्मू के मौसम की बात करें तो अभी वहां मानसून के असर के साथ में पश्चिमी विक्षोभ (western disturbance) का भी असर है| जिससे भूमध्य सागर से चलने वाली हवाएं अपने साथ नमी लेकर आती हैं| ऐसे में इस विपरीत स्थिति में जब यह दोनों आपस में टकराते हैं तो कम समय में ज्यादा नमी से भरे बादल छोटे इलाके के ऊपर बन जाते हैं और अचानक की कम समय में अत्यधिक बारिश होने लगती है|

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क्या बादल फटने का अंदाजा पहले-से लगाया जा सकता है? (Can a cloudburst be predicted in advance)
बादल फटने का अंदाजा पहले से लगा पाना काफी मुश्किल है| क्योकि सामान्यतः बादल फटने की घटनाएं 1 से 10 कि.मी की दूरी में छोटे पैमाने पर हुई मौसमी बदलाव के कारण होती है| रडार से एक एरिया के लिए बहुत भारी वर्षा होने का अंदाजा तो लगाया जा सकता है, लेकिन बादल फटने जैसी घटना हो सकती है यह बता पाना थोड़ा मुश्किल है|

भारत में बादल फटने की बड़ी घटनाएं कब-कब हुई? (major incidents of cloudburst happen in India)
2013 – उत्तराखंड व चमोली जिले में कई गाँव में हुई थी भारी तबाही
23 अगस्त 2011 – सहस्त्रधारा के पास स्थिति करलीगढ़ गांव में हुई पांच लोगों की मृत्यु व फसलों की तबाही
18 अगस्त 2011- बागेश्वर के शुम्गढ़ में स्कूल की छत गिरने से 18 बच्चों की मौत व भूस्खलन
7 अगस्त 2009 – पिटौरागढ़ के कई इलाकों में मलबे के ढ़हने से 43 लोग जमींदोज (grounded) हो गए
12 जुलाई 2007 – चमोली के सुरीखर्क में 8 लोगों की मौत
2005 – मुंबई में 8 से 10 950 मिमी तक बारिश
2009 – लेह में 200 से अधिक लोगो की मृत्यु, भारी तबाही
1999 – मदमहेश्वर घाटी में 109 लोगों की मौत
1996 – अमरनाथ में 250 श्रद्धालुओं की मौत, हजारों लोग हुए थे घायल
1995 – रैतोली – 16 लोगों की मौत
1983 – बागेश्वर, 37 की मौत
1979 – तवाघाट, 22 लोगों की मौत

बादल फटने से रोकथाम के उपाय? (Cloudburst prevention measures)
वैसे तो बदल फटने से रोकने के लिए कोई ठोस उपाय नहीं है। पर कुछ चीजें ऐसी हैं जिससे होने वाली तबाही को कुछ हद तक रोका जा सकता है| जैसे- अगर पानी के बहाव के लिए सही निकासी होना, घरों की दुरुस्त बनावट का होना और साथ में प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर चलने से इससे होने वाली त्रासदी से बचा जा सकता है|

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