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Omicron Variant : यूपी सहित देश के कई राज्यों में बढ़ी पाबंदियां, 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव टालने पर फैसला लेगा चुनाव आयोग

लखनऊ. Omicron Variant- कोरोना के नये वैरिएंट ओमिक्रॉन का खतरा भारत पर भी मंडराने लगा है। देश में अब तक इसके 350 से अधिक केस सामने चुके हैं। एक्सपर्ट्स नये वर्ष में तीसरी लहर आने की आशंका जता रहे हैं, जिससे लोग हलाकान हैं। सरकारों ने कोरोना की टेस्टिंग और रोकथाम के उपायों को तेज कर दिया है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात में नाइट कर्फ्यू लगा दिया गया है। मुंबई में धारा 144 लागू है। दिल्ली और कर्नाटक में आंशिक प्रतिबंध लगा दिया गया है। कई और राज्य सख्ती पर विचार कर रहे हैं। इस बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व निर्चाचन आयोग को पत्र लिखकर चुनाव टालने की सलाह दी है। इस पर मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने कहा कि उत्तर प्रदेश के हालातों का जायजा लेने के बाद इस पर फैसला लिया जाएगा।

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में 25 दिसंबर से नाइट कर्फ्यू लगाने का एलान कर दिया है। फैसले के बाद रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक बाहर निकलने की अनुमति होगी। सिर्फ आवश्यक सेवाओं को छूट रहेगी। शादी-विवाह के दौरान 200 लोगों को ही अनुमति मिलेगी। इस दौरान कोविड प्रोटोकॉल का सख्ती पालन कराया जाएगा। बाजारों में मास्क नहीं तो सामान नहीं के संदेश के साथ व्यापारियों को जागरूर करने के निर्देश दिये गये हैं। लेकिन यक्ष प्रश्न अभी भी मुंह बाये खड़ा है कि क्या चुनावी रैलियों पर प्रतिबंध लगेगा या कोई गाइडलाइन जारी होगी? क्योंकि सभी दलों की रैलियों में भीड़ खूब उमड़ रही है जिनमें सोशल डिस्टेंसिंग की बात करना भी बेमानी है। पिछले वर्ष पंचायत चुनावों की वजह से उत्तर प्रदेश में कोरोना के मामलों में तेजी से बढ़ोत्तरी देखने को मिली थी।

हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद सवाल यह भी है कि क्या चुनाव को टाला जा सकता है। अगर हां तो इसके क्या नियम हैं और इससे पहले कब-कब चुनावों को टाला गया गया है। आपके इन सभी सवालों के जवाब हम इसी वीडियो में देंगे।

इन परिस्थितियों में चुनाव आयोग टाल सकता है चुनाव
संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत आयोग चुनाव को करवाने के लिए स्वतंत्र है। लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 52, 57 और 153 में चुनावों को रद्द करने या टालने की बात कही गई है। इनके तहत नामांकन भर चुके कैंडिडेट की मौत के बाद, दंगा-फसाद, प्राकृतिक आपदा जैसी स्तिथि में, चुनाव में गड़बड़ी पर या फिर जहां मतदाताओं को पैसों देकर वोट लिए जा रहे हों या फिर बूथ कैप्चरिंग सामने आई हो, चुनाव आयोग चुनाव टाल सकता है। पिछले वर्ष 2020 में देश में पंचायत चुनाव और कई लोकसभा और विधानसभा के उपचुनावों को टाला गया था।