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UP Politics: सपाइयों ने कैसे कर दी इतनी बड़ी गलती? नतीजों से पहले ही जश्न मनाने लगे भाजपाई

लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधान परिषद उपचुनाव की दोनों सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों का निर्विरोध निर्वाचन तय हो गया है, क्योंकि सपा प्रत्याशी कीर्ति कोल का पर्चा रद्द हो गया है। इसकी वजह कोई और नहीं, बल्कि उनकी खुद की गलती है। पर्चा रद्द होने की वजह कीर्ति कोल की कम उम्र बताई गई है। विधान परिषद सदस्य पद पर निर्वाचित होने के लिए न्यूनतम उम्र 30 वर्ष होनी चाहिए, लेकिन खबरों के मुताबिक, सपा प्रत्याशी ने नामांकन पत्र में अपनी उम्र महज 28 वर्ष ही दिखाई थी। कीर्ति ने भी अहमद हसन के निधन से खाली हुई सीट पर नामांकन किया था। फिलहाल, भाजपा खेमे में जश्न का माहौल है।

रिटर्निंग अफसर ने प्रपत्रों की जांच के बाद आज नामांकन पत्र खारिज करने की कार्रवाई की है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या सपा प्रत्याशी को नहीं पता था कि उच्च सदन की सदस्यता के लिए न्यूनतम उम्र 30 वर्ष होनी चाहिए। और क्या समाजवादी पार्टी ने टिकट देते वक्त उनकी पात्रता नहीं चेक थी? अगर हां तो फिर इतनी बड़ी चूक कैसे हुई? समाजवादी पार्टी के एलएलसी कैंडिडेट कीर्ति कोल ने सोमवार को पार्टी प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल और विधानमंडल दल में सपा के मुख्य सचेतक मनोज पांडेय के नेतृत्व में ही नामांकन दाखिल किया था।

डिप्टी सीएम बृजेश पाठक का तीखा तंज
समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी का पर्चा खारिज होने पर उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने कहा, “जब नाश मनुष्य पर छाता है, पहले विवेक मर जाता है।” बृजेश पाठक ने कहा कि नामांकन पत्र भरते समय भी सतर्क नहीं हैं, आपने बड़ी त्रुटियां की हैं।

कोई चुनाव तो गंभीरता से लड़ लें: सुभासपा
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रवक्ता अरुण राजभर ने तंज कसते हुए ट्वीट किया। उन्होंने लिखा कि कोई तो चुनाव गंभीरता से लड़ लेते। राजनितिक अपरिपक्वता फिर सामने आ गई। एमएलसी उपचुनाव में सपा प्रत्याशी कीर्ति कोल का पर्चा खारिज। आदिवासी हितैषी होने का ढोंग रचने की जल्दबाजी में अपने प्रत्याशी की आयु देख नहीं पाए। यह आदिवासियों को अपमानित करने की साजिश थी जो अब उजागर हो गई।

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