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UP Politics: ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा से क्यों दूरी बना रहे हैं राजनीतिक दल?

लखनऊ. सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर की अति महात्वाकांक्षा ही उनके लिए ‘सिरदर्द’ बनती जा रही है। बीजेपी से गठबंधन तोड़कर वह सपा में शामिल हुए थे और अब वहां भी ‘तलाक’ हो गया है। ऐसे में उन्होंने अगले विकल्प के तौर पर बसपा को पहली पसंद बताया। लेकिन, ओम प्रकाश राजभर के पॉलिटिकल बैकग्राउंड को देखते हुए बहुजन समाज पार्टी काफी सतर्क है। पार्टी नेताओं का मानना है कि वह भरोसेमंद साथी नहीं हैं। कारण कि उनका किसी भी पार्टी से गठबंधन लंबा नहीं चला। वह जिस भी दल के साथ रहे, अपने बयानों से उसके लिए मुश्किल खड़ी करते रहे। यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी स्पष्ट कह दिया है कि उन्हें किसी की भी जरूरत नहीं है। बीजेपी खुद मजबूत पार्टी है।

ओमप्रकाश राजभर ने बहुजन समाज पार्टी के साथ अपना राजनीतिक करियर शुरू किया था। 2001 में मायावती से विवाद के बाद उन्होंने अलग होकर अपनी पार्टी बना ली थी। 2017 के विधानसभा में वह बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़े। योगी मंत्रिमंडल में उन्हें कैबिनेट मंत्री का ओहदा भी मिला। लेकिन, कुछ दिनों बाद ही उन्होंने बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया, नतीजन दोनों दलों की राहें अलग हो गईं।

…और बिखर गया भागीदारी संकल्प मोर्चा
बीजेपी से अलग होने के बाद ओम प्रकाश राजभर ने करीब एक दर्जन छोटे दलों को मिलाकर भागीदारी संकल्प मोर्चा बनाया। दावा किया गया कि 2022 में यह मोर्चा प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगा। लेकिन, चुनाव से ऐन वक्त पहले सुभासपा और सपा का गठबंधन हो गया। राजनीतिक महात्वाकांक्षा और अपने हितों को देखते हुए ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी से गठबंधन को चुना। नतीजन, ओम प्रकाश राजभर की अगुआई में गठित मोर्चा बिखर गया।

समाजवादी पार्टी से भी हो गया ‘तलाक’
बात यहीं खत्म नहीं हुई। सपा-सुभासपा ने पूरी दम से 2022 का चुनाव लड़ा। 2017 की तरह इस चुनाव में सुभासपा के 06 विधायक बने। नतीजों के बाद ओम प्रकाश राजभर के निशाने पर सीधे सपा सपा प्रमुख अखिलेश यादव आ गये। खासकर लोकसभा उपचुनाव में रामपुर और आजमगढ़ में मिली हार का ठीकरा सपा प्रमुख पर ही फोड़ा। कहा कि पार्टी की ऐसी दुर्गति का कारण अखिलेश यादव के एसी कमरों से बाहर नहीं निकलना है। इसके बाद समाजवादी पार्टी से भी उनके पॉलिटिकल रिश्ते खत्म हो गये।

ओम प्रकाश राजभर से दूरी बना रही बसपा?
समाजवादी पार्टी से ब्रेकअप कुबूल करने के बाद जब ओम प्रकाश राजभर से् विकल्प के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बसपा को पहली पसंद बताया। इसके बाद बसपा के राष्ट्रीय महासचिव व मायावती के भतीजे आकाश आनंद का एक ट्वीट आता है, जिसमें वह लिखते हैं कि यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री व बसपा अध्यक्ष मायावती जी के शासन-प्रशासन, अनुशासन की पूरी दुनिया तारीफ करती है। लेकिन, कुछ अवसरवादी लोग बहनजी के सहारे अपनी दुकान चलाना चाहते हैं। ऐसे स्वार्थी लोगों से सावधान रहने की जरूरत है। यूपी के सियासी गलियारों में चर्चा है कि आकाश के इस ट्वीट में निशाने पर सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ही हैं। आकाश के बयान पर सुभासपा प्रवक्ता अरुण राजभर ने कहा कि आकाश की अपनी राय है। हमने सिर्फ अपनी प्राथमिकताओं की बात की है। हम न तो बसपा के पास गये और न ही उनके नेतृत्व से कोई बात की।

अब क्या करेंगे ओपी राजभर?
राजनीति में कौन से दोस्त कब दुश्मन बन जाएं और दुश्मन दोस्त हो जाएं, कहना मुश्किल है। यहां कुछ भी निश्चित नहीं है। लेकिन, जिस तरह से वर्तमान हालात हैं राजभर के लिए आगे की राह आसान नहीं है। क्योंकि सपा और बीजेपी से पहले ही उनके राजनीतिक रिश्ते खराब हो चुके हैं। बसपा पहले ही सतर्क है। भागीदारी संकल्प मोर्चा टूटने के बाद छोटे दल शायद ही उनके पास फटकें। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2024 के आम चुनाव से पहले राजभर बीजेपी के साथ जा सकते हैं, लेकिन इस बार वह बहुत सौदा कर पाने की स्थिति में नहीं होंगे।