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मिशन उद्भव से स्मार्ट बन रहे सरकारी विद्यालय, प्राइवेट स्कूलों से भी आने लगे बच्चे, तकनीक से जुड़कर ले रहे ज्ञान


बाराबंकी. Smart Class in UP Primary Schools: शिक्षा में रोजाना हो रहे नये-नये बदलाव की दिशा में बाराबंकी जिले के सरकारी स्कूलों को स्मार्ट बनाने की परिकल्पना साकार होती दिख रही है। ‘मिशन उद्भव’ के तहत अभी तक जिले के 75 सरकारी विद्यालयों को स्मार्ट बनाकर वहां स्मार्ट क्लास की शुरुआत की जा चुकी है। यह सिलसिला आगे भी जारी है। यह पहल आईएएस संयुक्त मजिस्ट्रेट सुमित यादव की नेक सोच और बीएसए संतोष देव पांडेय के साथ बंकी की खंड शिक्षा अधिकारी सुषमा सेंगर समेत विभाग के अधिकारियों की मेहनत से सफल हो सकी है। वहीं इस प्रयास को लेकर बाराबंकी के बीएसए ने कहा कि परिषदीय विद्यालयों के बच्चे भी तकनीक से जुड़कर ज्ञानार्जन कर सकें। विभाग की यही कोशिश है और यह आगे भी जारी रहेगी।

स्मार्ट बन रहे सरकारी विद्यालय
बाराबंकी में बंकी ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय मोहम्मदपुर चौकी और कंपोजिट विद्यालय संदौली उमापुर समेत बाराबंकी के सरकारी स्कूलों में इन दिनों एक नया ट्रेंड देखने को मिल रहा है। यहां प्राइवेट स्कूल के बच्चे अब सरकारी स्कूलों का रुख कर रहे हैं। ऐसा यहां के स्मार्ट बन रहे सरकारी स्कूलों में मिलने वाली बेहतर सुविधाओं और शिक्षा के स्तर के कारण हो रहा है। दरअसल बाराबंकी में ‘मिशन उद्भव’ के तहत इन सरकारी स्कूलों को स्मार्ट इंफ्रास्टक्चर से लैस किया जा रहा है। सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लास चल सकें, इसलिये हर स्कूल को एक 43 इंच का स्मार्ट टीवी, एक यूपीएस, एक ब्लूटूथ स्पीकर और एक पेन ड्राइव दी गई है।

मेहनत हो रही सफल
यह पहल आईएएस संयुक्त मजिस्ट्रेट सुमित यादव की नेक सोच और बीएसए संतोष देव पांडेय के साथ बंकी की खंड शिक्षा अधिकारी सुषमा सेंगर समेत विभाग के अधिकारियों की मेहनत से सफल हो सकी है। अभी फिलहाल बाराबंकी की तहसील नवाबगंज के अंतर्गत परिषदीय विद्यालयों को स्मार्ट बनाया गया है। जिसके तहत अब तक 75 विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की शुरुआत हो चुकी है और यह सिलसिला आगे भी जारी है। बेसिक शिक्षा विभाग धीरे-धीरे जिले के सभी सरकारी स्कूलों को स्मार्ट बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

प्राइवेट स्कूलों से भी आ रहे बच्चे
शिक्षकों ने बताया कि परिषदीय विद्यालयों में सुविधाओं में हो रहे ऐसे क्रांतिकारी सुधार का ही नतीजा है कि अधिक से अधिक छात्र अब सरकारी स्कूलों में दाखिला ले रहे हैं। अभिभावकों का भी मानना है कि सुविधाओं और पढ़ाई के स्तर में सुधार के कारण अब वह अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाना चाहते हैं। बच्चों का भी कहना है कि स्मार्ट क्लास की शुरूआत होने से वह अब पहले से ज्यादा समझकर पढ़ाई कर पाते हैं। अब वह जो भी पढ़ते हैं, वह उनके दिमाग में बेठ जाता है। बच्चों ने बताया कि स्मार्ट क्लास से उनकी पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ी है।

तकनीक से जुड़कर बच्चे ले रहे ज्ञान
वहीं इस पहल पर बाराबंकी के बीएसए संतोष देव पाण्डेय ने बताया कि परिषदीय विद्यालयों के बच्चे भी तकनीक से जुड़कर ज्ञानार्जन कर सकें। इस उद्देश्य को लेकर एसडीएम सदर सुमित यादव ने ‘मिशन उद्भव’ की परिकल्पना की थी, जो बेसिक शिक्षा विभाग के संयुक्त प्रयास से अब साकार हुई है। अब तक 75 विद्यालयों को स्मार्ट बनाया जा चुका है। यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि विभाग की यही कोशिश है कि सरकारी स्कूलों को स्मार्ट इंफ्रास्टक्चर से लैस किया जा सके और पढ़ाई का स्तर और ऊपर उठे। जिससे सरकारी विद्यालयों में ज्यादा से ज्यादा बच्चे आयें और सरकार की मंशा के अनुरूप उन्हें शिक्षा दी जा सके।