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शिवपाल के आने से बीजेपी को क्या होगा फायदा और सपा को कितना नुकसान?

लखनऊ. ‘मुलायम परिवार’ का अंदरूनी झगड़ा एक बार फिर सतह पर आता दिख रहा है। भतीजे (अखिलेश यादव) ने चाचा को सपा विधायक मानने से इनकार किया तो शिवपाल यादव भड़क उठे। कहा कि परिवार में एका के लिए क्या नहीं किया? पर कोई उनके त्याग को तवज्जो नहीं देने वाला। इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर नये समीकरणों को हवा दे दी। अब ट्विटर पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को फॉलो कर इस बहस को और हवा दे दी है। इससे पहले शिवपाल सिंह यादव पीएम और सीएमओ को ही फॉलो करते थे।

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो अब शिवपाल यादव को अपना राजनीतिक भविष्य भाजपा के साथ ही सुरक्षित दिखता है। तमाम कोशिशों के बावजूद चाचा के प्रति भतीजे का दिल नहीं पसीज रहा है और भाई मुलायम सिंह यादव भी खुलकर कोई निर्णय नहीं ले पा रहे हैं। यूपी विधानसभा चुनाव में सबकुछ दांव पर लगाकर शिवपाल ने सपा से गठबंधन किया था, बदले में उन्हें निराशा ही मिली। अखिलेश ने सुभासपा जैसी पार्टियों को खूब टिकट दिये, लेकिन चाचा की पार्टी को एक भी टिकट नहीं दिया। शिवपाल जसवंतनगर से लड़े वह भी सपा के चुनाव चिह्न पर। लिहाला, 2017 के बाद से शिवपाल के साथ कंधे से कंधा मिलकर चल रहे साथी भी उनसे किनारा करने में अपनी भलाई समझ रहे हैं। क्योंकि उन्हें लगता है कि जब एक सीट के लिए वह उन साथियों को छोड़ सकते हैं जो परिवार की लड़ाई के वक्त उनकी तरफ आ गये थे।

अपर्णा ने ली बढ़त
वहीं, दूसरी तरफ परिवार की बहू अपर्णा यादव बीजेपी में शामिल हो चुकी हैं, जहां उनका फ्यूचर ब्राइट नजर आ रहा है जबकि शिवपाल यादव को अभी भी किसी ‘चमत्कार’ की उम्मीद है। उन्हें लगता है कि शायद सपा में एक बार फिर से उनका रुतबा हासिल हो सके, जिसकी उम्मीद न के बराबर है। यूपी की राजनीति को करीब से जानने वाले पत्रकारों का कहना है कि दरअसल, शिवपाल का सपा के प्रति मोह नहीं छूट रहा है। मुलायम को साइकिल के करियर बिठाकर उन्होंने पार्टी को खड़ा करने में खूब खून-पसीना एक किया है। उन्हें पता है कि अगर एक बार बीजेपी में चले गये तो फिर वापसी असंभव होगी।

एक तीर से दो निशाने लगा रही बीजेपी
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो भारतीय जनता पार्टी भी जानती है कि यूपी में उसका मुकाबला समाजवादी पार्टी से ही है। ऐसे में अगर कार्यकर्ताओं पर मजबूत पकड़ रखने वाले शिवपाल साथ आ गये तो बीजेपी के लिये यह एक तीर से दो निशाने जैसी बात होगी। एक तो यूपी का 10-12 फीसदी यादव वोट दो हिस्सों में बंट जाएगा, दूसरा सपा भी खूब कमजोर हो जाएगी। सूत्रों की मानें तो बीजेपी ने शिवपाल यादव को राज्यसभा भेजने का ऑफर दिया है जबकि जसवंतनगर की सीट पर उपुचनाव उनके बेटे आदित्य यादव को चुनाव मैदान में उतारने का आश्वासन दिया है।

बीजेपी से मिले हैं शिवपाल यादव: केशव देव मौर्य
समाजवादी पार्टी के गठबंधन में सहयोगी महान दल के मुखिया केशव देव मौर्य का दावा है कि शिवपाल यादव का बीजेपी से रिश्ता पहले से ही है। वह हमेशा से ही बीजेपी के साथ रहे हैं। बीजेपी उनके जरिये यादव वोट बांटने का प्लान बना रही है। एक टीवी चैनल से बातचीत में केशव देव मौर्य ने कहा कि केशव देव मौर्य ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मायावती का बंगला खाली कराया गया, जिसे बाद में शिवपाल यादव को अलॉट कर दिया गया। यह लखनऊ का सबसे भव्य बंगला है, जिसे बीजेपी सरकार ने शिवपाल को ऐसे ही थोड़े दिया है। दोनों के अपने स्वार्थ निहित हैं। महान दल के मुखिया ने कहा कि बीजेपी जानती है कि शिवपाल यादव के अलग होने से समाजवादी पार्टी को बड़ा नुकसान होगा।