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टिकट न मिलने से रुठ गये छह बार के विधायक, सपा से कर दी बगावत, अखिलेश यादव के सामने आई बहुत बड़ी मुश्किल

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) एक बार फिर यूपी विधानसभा चुनाव 2022 (UP Vidhan Sabha Election 2022) जीतकर अपनी सरकार बनाना चाहते हैं। लेकिन शायद उनकी पार्टी के नेता ही अब बागी होकर अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) की मुश्किलें बढ़ाने में लग गये हैं। दरअसल टिकट नहीं मिलने से नाराज पूर्व मंत्री और छह बार के विधायक राजीव कुमार सिंह (Rajiv Kumar Singh) उर्फ राजीव हड़ाहा ने अखिलेश और समाजवादी पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। दरअसल उन्होंने अपनी सीट दरियाबाद विधानसभा सीट (Dariyabad Vidhan Sabha Seat) से अपने बेटे रिंकू सिंह के लिये टिकट मांगा था। लेकिन अखिलेश यादव ने इस सीट से पूर्व मंत्री अपने बेहद करीबी अरविंद सिंह गोप को टिकट दे दिया है। इसी बात से नाराज होकर अब वब बगावती तेवर दिखाने लगे हैं और बेटे को निर्दलीय चुनाव लड़ाने की बात कर रहे हैं।

मजबूत पकड़ बनाने के लिये गोप को दिया टिकट
दरअसल सपा ने बाराबंकी में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखने के लिए 6 बार के विधायक और एक बार सपा सरकार में राज्य मंत्री रहे राजा राजीव कुमार सिंह के बेटे रिंकू सिंह को टिकट नहीं दिया है। वह अपने बेटे रिंकू सिंह को बाराबंकी की दरियाबाद विधानसभा सीट से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ाना चाहते थे। लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में राजा को हार झेलनी पड़ी थी और इस बार भी माहौल उनके पक्ष में नहीं था। इसी को देखते हुए अखिलेश यादव ने दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र से पूर्व मंत्री और अपने बेहद करीबी अरविंद सिंह गोप को उम्मीदवार बनाया है। इसी बात से नाराज राजा राजीव सिंह ने सपा के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा है कि यहां से बाहरी को टिकट दिया गया है। अब बाहरी और भीतरी की लड़ाई होगी।


अखिलेश को जल्द सुलझाना होगा विवाद
बेटे का टिकट कटने से नाराज राजा राजीव सिंह ने अपने बेटे को निर्दलीय चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि वह दो दिन के अंदर इसको लेकर कोई ऐलान करेंगे। वहीं राजा राजीव कुमार सिंह ने भी अखिलेश यादव के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा कि जब वह अपने पिता मुलायम की पुरानी सीट से चुनाव लड़ सकते हैं, तो मैं अपने पिता की सीट से चुनाव क्यों नहीं लड़ सकता। ऐसे में बाराबंकी जिले की दरियाबाद विधानसभा सीट से सपा की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। क्योंकि जब क्षेत्र में मजबूत दावेदारी करने वाली पार्टी के नेता ही पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे, तो घोषित प्रत्याशी चुनाव कैसे जीतेगा, यह बड़ा सवाल है। ऐसे में अखिलेश यादव को जल्द ही इस बगावत को अपने पक्ष में लाकर अरविंद सिंह गोप की दावेदारी को मजबूत करना होगा।