Tuesday , February 7 2023

Ravidas Jayanti : संत रविदास के चरणों में सियासत

वाराणसी. Ravidas Jayanti पर काशी स्थित सीरगोवर्धन के संत रविदास मंदिर पर आस्था और सियासत का अद्भुत संगम दिखा। मंदिर प्रांगण में धूमधाम से संत शिरोमणि रविदास की जयंती मनाई गई। पूरे दिन देश-प्रदेश के दिग्गज नेताओं का आना-जाना लगा रहा। हर कोई खुद को पक्का ‘रैदासी’ जताने की कोशिश कर रहा था। बुधवार को सुबह तड़के रविदास मंदिर में हाजिरी लगाने पंजाब के मुख्यमंत्री चरण जीत सिंह चन्नी पहुंचे। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी और राहुल गांधी भी पहुंचे। उन्होंने न केवल यहां मत्था टेका बल्कि लंगर में सेवादारों को भोजन परोस कर सेवा भी की और खुद भी प्रसाद ग्रहण किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी पांत में बैठकर लंगर छका। इसके अलावा तमाम और छोटे-बड़े नेता भी दर्शन को पहुंचे।

बसपा प्रमुख मायावती नहीं पहुंची तो उन्होंने ट्वीट कर प्रदेशवासियों रविदास जयंती की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, सामाजिक परिवर्तन के संतों की परम्परा में जाने-माने संतगुरु रविदास जी जाति-भेद के ख़िलाफ आजीवन कड़ा संघर्ष करते रहे। ऐसे संतगुरु के उपदेशों के मुताबिक सरकारें अगर मन चंगा करके काम करेंगी तभी लोगों का सही से भला होगा तथा देश में विकास की गंगा आमजन को ज़रूर तृप्त करेगी।वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीतापुर की रैली में वाराणसी के रविदास मंदिर का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा सरकार में मंदिर का विकास करने का काम किया।

दलितों की आस्था का केंद्र रहा है रविदास मंदिर
वर्ष 1965 में सीर गोवर्धन में बना रविदास मंदिर दशकों से यूपी और पंजाब के दलितों की आस्था का केंद्र रहा है। अब जब 13 फीसदी दलितों की आबादी वाले पंजाब और 20 फीसदी से ज्यादा दलित आबादी वाले उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं तो नेताओं का इस मंदिर की ओर रुख करना स्वाभाविक है। दलितों के लिए वाराणसी का सीर गोवर्धनपुर सबसे बड़ा तीर्थ है। रविदास जयंती पर बड़ी संख्या में रैदासी भक्त पंजाब, हरियाणा से यहां जमा होते हैं। इसीलिए सभी पार्टियों की मांग पर चुनाव आयोग ने पंजाब चुनाव के लिए 16 फरवरी के इलेक्शन शेड्यूल को बदला था।

सीर गोवर्धन में आते रहे हैं दिग्गज नेता
वाराणसी के सीर गोवर्धन में संत रविदास की जन्म स्थली है। हर साल यहां पर आस्था के संगम के बीच भी सियासी लहरें उफान मारते दिखती हैं। बीते वर्ष भी यहां केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव आए थे। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यहां तीन बार मत्था टेक चुके हैं। वर्ष 2016 और 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केवल यहां मत्था टेका था बल्कि लंगर भी चखा था। मायावती, राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल भी समय समय पर यहां हाजिरी लगाते रहे हैं। इसके अलावा देश के दो पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह और डॉ. केआर नारायण भी यहां आकर मत्था टेक चुके हैं।