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पीएम मोदी ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का किया उद्घाटन, जानिए इसकी खासियत

वाराणसी. Kashi Vishwanath Corridor in Varanasi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट श्री काशी विश्वनाथ धाम का बनारस में आज लोकार्पण किया। सात वार और नौ त्योहार की विशेषता का शहर बनारस और यहां के लोग इस लोकार्पण को लेकर खासे उत्साहित है। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने भी इस कार्यक्रम को एक बड़े महोत्सव के रूप में तब्दील करने के लिए शहर को खूब सजाया और संवारा। जानकारों की अगर मानें तो मोदी और योगी सरकार की कोशिश थी कि काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण समारोह से निकलने वाली हर तस्वीर धार्मिक माहौल के रंग से रंगी नजर आये और बनारस को पूरे देश के सामने धर्म और विकास के एक मॉडल के रूप में पेश किया जा सके, जिससे चुनावों पर इसका सकारात्मक प्रभाव दिखायी दे। यही कारण है कि सरकारी स्तर पर इस कार्यक्रम को बड़ा और भव्य रूप दिया गया।

निर्माण में खर्च हुए 340 करोड़ रुपये
आपको बता दें कि सन 1669 में अहिल्याबाई होल्कर ने काशी विश्वनाथ मंदिर का पुनरोद्धार कराया था। उसके लगभग 350 वर्ष बाद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंदिर के विस्तारीकरण और पुनरोद्धार के लिये 8 मार्च, 2019 को विश्वनाथ मंदिर कॉरीडोर का शिलान्यास किया था। शिलान्यास के लगभग 2 साल 8 महीने बाद इस ड्रीम प्रोजेक्ट के 95 प्रतिशत कार्य को पूरा कर लिया गया है। वर्तमान समय में इस कॉरिडोर में 2600 मजदूर और 300 इंजीनियर लगातार तीन शिफ्ट में काम कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इस पूरे कॉरिडोर के निर्माण में 340 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। हालाँकि पूरे खर्च को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। पूरे कॉरिडोर को लगभग 50,000 वर्ग मीटर के एक बड़े परिसर में बनाया गया है। इसका मुख्य दरवाजा गंगा जी की तरफ ललिता घाट से होकर है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर जिस बुनियाद पर साकार हो रहा है उसमें तकरीबन 400 मकान और सैकड़ों मंदिर और लगभग 1400 लोगों को पुनर्वासित करना पड़ा है।

दो भागों में बांटा गया विश्वनाथ कॉरिडोर
विश्वनाथ कॉरिडोर को दो भागों में बांटा गया है। मंदिर के मुख्य परिसर को लाल बलुआ पत्थर के द्वारा निर्मित किया गया है। इसमें 4 बड़े बड़े गेट लगाए गए हैं। इसके चारों तरफ एक प्रदक्षिणा पथ बनाया गया है। उस प्रदक्षिणा पथ पर 22 संगमरमर के शिलालेख लगाए गए हैं जिनमें काशी की महिमा का वर्णन होगा। काशी विद्वत परिषद् के महामंत्री के मुताबिक मुख्य मंदिर परिसर में 22 शिलालेख ऐसे लगाए गये हैं जिसमें भगवान विश्वनाथ से संबंधित स्तुतियां हैं और आद्य शंकराचार्य ने जिन स्तुतियों का गान किया है वो हैं। अन्नपूर्णा स्त्रोत हैं और जिन स्तुतियों को भगवान शंकर ने गान किया है, उन स्त्रोतों को लगाया गया है। बाकी भगवान शिव ने यहां पर 56 विनायक भेजा, द्वादश आदित्य भेजा। उनके संदर्भ में कैसे है काशी में पंचनद है, काशी में पंचतीर्थ है, काशी में भगवान शिव की बारात कैसे निकलती है, भगवान विश्वनाथ काशी में पहली बार कब आए, भगवान शिव पार्वती का विवाह का उल्लेख है, ऐसे 24 पैनल बन रहे हैं।

24 भवनों का एक बड़ा कैम्पस
मंदिर के द्वार की दूसरी तरफ 24 भवनों का एक बड़ा कैम्पस बना है जिसका मुख्य दरवाजा गंगा की तरफ ललिता घाट से आयेगा। इस परिसर में वाराणसी गैलरी काफी महत्वपूर्ण है। विश्वनाथ धाम के विस्तारीकरण और विकास के दौरान कुछ घरों से निकली मूर्तियां, पुराने घरों से निकले नक़्क़ाशीदार दरवाजे, खिड़कियों को भी धरोहर के रूप में वाराणसी गैलरी में प्रदर्शित करने की योजना है। काशी की आध्यात्मिक परंपरा को भी गैलरी में प्रदर्शित किया गया है। इसके अलावा इसमें में 24 भवन बनाए जा रहे हैं जिसमें मुख्य मंदिर परिसर, मंदिर चौक, मुमुक्षु भवन, सिटी गैलरी, जलपान के मल्टीपरपज हॉल, यात्री सुविधा केंद्र, इत्यादि भवन जो यहां के बड़े खूबसूरती साथ ही साथ गंगा स्थित गंगा व्यू कैफे, गंगा व्यू गैलरी बनाई जा रही है। जिससे मां गंगा की सुंदर छटा दिखाई देगी। जानकारों के मुताबिक इस प्रोजेक्ट को बनाने का पूरा उद्देश्य एकमात्र यह था कि काशी के अध्यात्म, काशी की वास्तु कला को उठाते हुए पूरे प्रोजेक्ट में एक दिव्य अनुभूति कराते हुए श्रद्धालुओं को धार्मिक भाव जगाजगाया जा सके।