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जानें Kanpur Metro की डिजाइन और खासियत, जिसने पीएम मोदी को भी सवार होने पर किया मजबूर

कानपुर. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) ने नये साल का तोहफा देते हुए कानपुर मेट्रो (Kanpur Metro) के नौ किलोमीटर लंबे प्रायोरिटी कॉरिडोर में यात्री सेवाओं का शुभारंभ कर दिया है। कानपुर मेट्रो की डिडाइन और खासियत से पीएम मोदी भी इस कदर प्रभावित हुए कि वह खुद इसकी सवारी करने को मजबूर हो गये। 15 नवंबर 2019 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने कानपुर मेट्रो के सिविल निर्माण कार्य की शुरूआत की थी। इसके बाद 2 साल से भी कम समय में बीते 10 नवंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आईआईटी कानपुर से मोतीझील के बीच नौ किलोमीटर प्रायॉरिटी कॉरिडोर में कानपुर मेट्रो के ट्रायल रन की शुरूआत की। जिसके बाद सीएमआरएस ने कानपुर मेट्रो को प्रायोरिटी कॉरिडोर पर कॉमर्शियल रन के लिए एनओसी दे दी। कानपुर मेट्रो के पूरे नौ किमी के हिस्से को ग्रीन बिल्डिंग कोड के अनुसार विकसित किया गया है। जो इसे पर्यावरण के लिए सबसे ज्यादा सुरक्षित बनाता है।

जानें कानपुर मेट्रो की खासियत
Kanpur Metro तीन डिब्बों के साथ ‘आईआईटी-कानपुर से मोतीझील’ (IIT Kanpur to Moti Jheel) तक प्राथमिकता खंड (प्रायोरिटी कॉरिडोर) पर चलेगी। आम यात्रियों के लिये सेवाएं 29 दिसंबर 2021 से शुरू होंगी। कानपुर मेट्रो की सेवा सुबह छह बजे से रात दस बजे तक उपलब्ध रहेगी। शुरुआत में क्यूआर कोड से टिकट की सुविधा होगी, इसके बाद लोगों के लिए स्मार्ट कार्ड सुविधा भी शुरू कर दी जाएगी। आने वाले दिनों में यूपीएमआरसी GoSmart कार्ड भी पेश करेगी, जो एकल यात्रा पर 10 फीसदी की छूट प्रदान करेगा। कोरोना के समय यह यात्रियों को संपर्क रहित यात्रा अनुभव प्रदान करेगा। कानपुर मेट्रो शहरी परिवहन के अन्य साधनों की तुलना में सस्ती है। यह ट्रैफिक जाम में फंसे बिना यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचने में मदद करेगी। साथ ही समय और धन की भी बचत करेगी।

कानपुर मेट्रो में दो कॉरिडोर
कानपुर मेट्रो रेल परियोजना (Kanpur Metro Rail Corporation) (KMRC) में दो कॉरिडोर शामिल हैं। जिसकी कुल लंबाई 32.5 किमी है। पहला कॉरिडोर ‘आईआईटी कानपुर से नौबस्ता’ 23.8 किमी लंबा है, जबकि दूसरा कॉरिडोर ‘चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय से बर्रा-8’ 8.6 किमी लंबा है। नौ एलिवेटेड मेट्रो स्टेशनों वाले पहले कॉरिडोर का ‘आईआईटी-कानपुर से मोतीझील’ का संचालन शुरू हो चुका है। कानपुर मेट्रो की ट्रेनें ‘रीजेनरेटिव ब्रेकिंग’ तकनीक से लैस होंगी। जिससे ट्रेन संचालन में 35 फीसदी तक ऊर्जा की बचत भी होगी।

कानपुर मेट्रो का डिजाइन
कानपुर मेट्रो के स्टेशनों और डिपो पर लगी लिफ्ट भी रीजेनरेटिव ब्रेकिंग तकनीक वाली हैं, जो ऊर्जा बचाएंगी। इनमें 34 फीसदी तक की ऊर्जा की बचत होगी। ऊर्जा की बचत के लिए सभी मेट्रो परिसरों में 100 फीसदी एलईडी लाइटिंग होगी। इसके अलावा मेट्रो डिपो और स्टेशनों पर सोलर पैनल भी लगाये गये हैं। कानपुर मेट्रो को खूबसूरती से डिजाइन किया गया है और इसे ओएचई (OHE) (Over Head Electrification) (ओवर हेड इलेक्ट्रिफिकेशन) के बजाय तीसरी रेल द्वारा संचालित किया जाएगा। इसमें मेट्रो ट्रेनों के नियमित रखरखाव और रखरखाव के लिए डिज़ाइन किया गया एक ग्रीन डिपो भी है। इसमें ऊर्जा की बचत के साथ-साथ वाटर रिचार्जिंग की सुविधा भी होगी।