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कौन हैं पसमांदा मुसलमान? जिनके जरिये भाजपा ने तैयार किया है 2024 का मास्टर प्लान

लखनऊ. Pasmanda Muslims and Modi: जबसे पीएम मोदी (PM Modi) ने मीटिंग के दौरान सामाजिक समीकरण के साथ पसमांदा मुस्लिमों (Pasmanda Muslims) के विकास पर फोकस करने की बात कही है तब से देशभर में इस वर्ग को लेकर एक बड़ी बहस छिड़ गयी है| पर क्या आप जानते हैं, कौन हैं ये पसमांदा मुस्लिम और किस तरह से रहते हैं यह भारत में? आइये हम आपको इनके बारे में थोड़ी जानकारी देते हैं-

पसमांदा मुस्लिम कौन हैं? (Who are the Pasmanda Muslims?)

पसमांदा एक फ़ारसी शब्द है जिसका मतलब ‘जो लोग दबे, सताए या पीछे छूटे हुए लोग हैं’| इस हिसाब से देश में मुसलमानों की कुल आबादी का 85 प्रतिशत हिस्सा पसमांदा कहलाता है| जिसमे दलित व पिछड़े वर्ग के मुस्लिम आते हैं, जो समाज में एक अलग सामाजिक लड़ाई लड़ रहे हैं और जिन्हे अंबेडकर और ज्योतिबा फूले जैसे एक दृढ और सक्षम नेता की जरूरत है| इतिहास पर अगर एक बार गौर करें तो पसमांदा आंदोलन लगभग 100 साल पुराना है| 90 के दशक में पसमांदा मुसलमानों के हक़ में 2 बड़े संगठन ‘ऑल इंडिया यूनाइटेड मुस्लिम मोर्चा’ और ‘ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महज’ नाम से गठित हुए, जो पसमांदा मुसलमाओं के तमाम छोटे-छोटे संगठनों की अगुवाई करते हैं| यह छोटे संगठन यूपी, बिहार, झारखण्ड और पश्चिम बंगाल में ज्यादा मिलते हैं| इनके संगठन पसमांदा मुसलमानों के लिए आरक्षण (reservation) की भी बात करते रहे हैं|

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क्या मुस्लिम वर्ग में भी जाति व्यवस्था है? (caste system in Muslim class)
मुस्लिम वर्ग में भी जाति व्यवस्था ठीक उसी तरह व्यापक है जैसे हिन्दू जाति वर्ग में है| हिंदुस्तान में रहने वाले 15 प्रतिशत मुस्लमान ऊंची या सवर्ण जाति के माने जाते हैं, जिन्हे ‘अशरफ’ कहा जाता है| बाकी बचे 85 प्रतिशत को दलित या बैकवर्ड माना जाता है, जिन्हे अरजाल और अज़लाफ़ कहा जाता है| यह दूसरा वर्ग आर्थिक, सामाजिक और शैक्षिक दृष्टिकोण से पिछड़ा व दबा हुआ है|

भारत में मुस्लिम जाति कितने वर्गों में बंटा है? (Into how many classes is the Muslim caste divided in India)
भारत में मुस्लिम वर्ग मुख्यता तीन वर्ग और सैकड़ों बिरादरियों में बंटा हुआ है| उच्च या सवर्ण जाति के मुसलमानों को ‘अशरफ’ कहा जाता है जिनका ओरिजिन पश्चिम या मध्य एशिया से है, जिनमे सैयद, मुग़ल, पठान आदि लोग आते हैं| दूसरे वो लोग हैं जो भारत की सवर्ण जाति से तालुख रखते थे लेकिन धर्म परिवर्तन कर मुसलमान बन गए, पर इन्हें भी उच्च वर्ग का दर्जा प्राप्त है| इसमें मुस्लिम राजपूत, चौधरी मुस्लिम, सैयद ब्राह्मण, ताजा या त्यागी मुस्लिम और ग्रहे या गौर मुस्लिम आते हैं| दलित या बैकवर्ड समुदाय में जुलाहा (अंसारी), फ़क़ीर (अल्वी), धोबी (अवारती), मनिहार (सिद्दीक़ी) आदि शामिल है|

भारत में किन क्षेत्रों में पसमांदा मुसलमानों की है बड़ी तादाद (Which areas in India have a large number of Pasmanda Muslims)
खासतौर पर मुरादाबाद, अलीगढ़, मेरठ, वाराणसी जैसे शहरों में उनकी बड़ी तादाद है, जो दस्तकारी से जुड़े मुस्लिमों की आबादी वाले इलाके हैं।’ बता दें कि रामपुर और आजमगढ़ जैसी लोकसभा सीटों पर हाल ही में हुए उपचुनावों में सपा को करारी हार झेलनी पड़ी थी, जबकि इन्हें उसके गढ़ के तौर पर देखा जाता है। भले ही भाजपा को इस जीत में मुस्लिमों का बड़ा योगदान न मिला हो, लेकिन यह साफ है कि सपा के पक्ष में भी वह उतनी मजबूती से नहीं खड़ा रहा। ऐसे में भाजपा मानती है कि मुस्लिमों के बड़े वर्ग की सपा से दूरी उसके लिए अवसर की तरह हो सकती है।

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पसमांदा ऐक्टिविस्ट क्यों कर रहे स्वदेशी और विदेशी का दावा (Why are Pasmanda activists claiming indigenous and foreign)
मुस्लिम मामलों के जानकार और पसमांदा के मुददों पर काम करने वाले डॉक्टर अहमद फैज़ बताते हैं कि हमे भारतीय और विदेशी मूल के मुस्लिम में फर्क समझना आना चाहिए| इनके अनुसार अशरफ मुस्लिम वर्ग ‘विदेशी मूल’ के हैं जो अपने को शासक वर्ग मानते हैं| जबकि पसमांदा मुस्लिम भारतीय ही हैं जो किसी दौर में हिन्दू ही थे लेकिन जब मजहब बदलकर मुस्लिम बने तो अपनी जाति और संस्कृति भी लेकर इस्लाम में आ गए|

पीएम मोदी की पहल पर क्या कहते हैं विश्लेषक (analysts say on PM Modi’s initiative)
पीएम मोदी की इस नई पहल का कई राजनीतिक विश्लेषकों ने स्वागत किया है क्योकि इस पहल में पहली बार कोई मुस्लिम वर्ग में वंचितों के विकास की बात कर रहा है| जबकि कुछ लोग इसे वोट बैंक के लिए सोची-समझी रणनीति के रूप में देख रहे हैं| ऐसा इसलिए क्योकि हाल ही में यूपी के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 8 प्रतिशत वोट मिला था, जिसमे से वोट का एक बड़ा मत इस वर्ग का ही माना जा रहा है| ऐसे में मोदी की यह पहल खासतौर पर उत्तर प्रदेश में आने वाले दिनों में कुछ खास असर दिखा सकती है|

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