Tuesday , February 7 2023

एक बच्चे के दो-दो पिता, पैदा होते ही शुरू हो गई मेरा-तुम्हारा की जंग, अब DNA टेस्ट करेगा फैसला

बाराबंकी. जनपद बाराबंकी (Barabanki) के जिला महिला अस्पताल में आज नवजात बच्चा बदलने को लेकर दो परिवार आमने-सामने आ गये और जमकर बवाल हुआ। अस्पताल में उस समय अफरा तफरी का माहौल बन गया, जब एक परिवार के बच्चे की मौत हो गई। जबकि दूसरे परिवार का बच्चा एकदम स्वस्थ था। डाक्टरों ने जब एक परिवार को उनके बच्चे की मौती की खबर दी तो वह आक्रोशित हो गये और अस्पताल प्रशासन पर बच्चा बदलने का आरोप लगाने लगे। परिवार ने सीएमओ ऑफिस से लेकर नगर कोतवाली तक हंगामा किया और बच्चों के डीएनए टेस्ट की मांग पर अड़ गये। अस्पताल प्रशासन दोनों बच्चों का डीएनए टेस्ट कराने जा रहा है, जिससे विवाद शांत कराया जा सके। वहीं दूसरा परिवार भी अस्पताल प्रशासन के फैसले से सहमत है और बच्चों के डीएनए टेस्ट को राजी है। यानी कौन बच्चा किसका है, यह फैसला अब डीएनए टेस्ट (DNA Test) से हो सकेगा।

बच्चा बदलने का आरोप
पूरा मामला बाराबंकी जिला महिला अस्पताल से जुड़ा हुआ है। जहां एक हर्षिता वर्मा नाम की एक महिला फतेहपुर सीएचसी से रेफर होकर प्रसव कराने आयी थी। उसे गीता देवी नाम की आशा बहू लेकल आई थी। महिला हर्षिता के ऑपरेशन से पैदा हुए नवजात बच्चे को डाक्टरों ने एसएनसीयू वार्ड में मशीन में रखने को कहा। जिसके बाद उसके परिजनों ने उसे वहां रखवा दिया। डाक्टरों के मुताबिक हर्षिता के बच्चे को सांस की नली में कुछ दिक्कत थी, इसीलिये आज सुबह उसे लखनऊ रेफर करने की सलाह उसके परिजनों को दे दी गई थी। जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई और इसकी जानकारी इलाज कररहे डाक्टरों ने अपने आलाधिकारियों के साथ उसके परिजनों को दे दी।

अस्पताल में जमकर हुआ बवाल
वहीं इसी बीच जिला महिला अस्पताल में जैदपुर से रेफर होकर नीलम देवी नाम की एक महिला का नवजात बच्चा वार्ड में भर्ती कराया गया। जिसकी खोपड़ी गोल नहीं थी। जो इलाज के बाद अब पूरी तरह से स्वस्थ है। लेकिन हर्षिता वर्मा के परिजन जैदपुर से आये इस बच्चे को अपना बच्चा बताने लगे और हंगामा करना शुरू कर दिया। हर्षिता वर्मा के बच्चे की मौत के बाद उसके परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन ने बच्चे को बदल दिया है। जबकि उनका बच्चा कल रात में पैदा हुआ था और वह एकदम स्वस्थ था। अस्पताल प्रशासन पर बच्चा बदलने का आरोप लगाकर हर्षिता के पति और बाकी परिजनों ने बाराबंकी सीएमओ ऑफिस से लेकर नगर कोतवाली तक हंगामा किया और दोनों बच्चों के डीएनए टेस्ट की मांग पर अड़ गये। जिसके बाद अस्पताल प्रशासन अब बच्चों का डीएनए टेस्ट कराकर परिजनों के भ्रम को खत्म करने की बात कह रहा है। वहीं जैदपुर से आये नीलम देवी के बच्चे के साथ आया उसका पति विक्रम और आशाबहू रीता देवी भी डीएनए टेस्ट कराने की बात पर सहमत हैं। उनका कहना है कि डीएनए टेस्ट हो जाये, जिससे उनका बच्चा उन्हें मिल सके।

डीएनए टेस्ट से सामने आएगा सच
वहीं अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात डाक्टर एम.ए. खान ने बताया कि जिला महिला चिकित्सालय के एसएनसीयू वार्ड में सुबह 10:55 बजे हर्षिता नाम की महिला का एक बच्चा भर्ती किया गया था। जिसकी सांस नली में कुछ दिक्कत थी और उसे झटके भी आ रहे थे। डाक्टर ने बताया कि बच्चा रात पैदा हुआ था और रात भर चले उसके इलाज के बाद जब उसकी हालत में सुधान नहीं हुआ तो उनके परिजनों को बच्चे को लखनऊ रेफर करने की जानकारी दी गई। जिसके बाद उसके परिजन बच्चा बदलने की बात कहकर बवाल करने लगे और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जबकि नीलम देवी का बच्चा जो जैदपुर से इलाज के लिये भर्ती किया गया था, उसे वह लोग अपना बताने लगे। इस दौरान हर्षिता के बच्चे की सुबह करीब 11:55 बजे मौत हो गई। जबकि उसके परिजन नहीं मान रहे हैं। ऐसे में दोनों बच्चों का डीएनए टेस्ट कराया जाएगा। जिससे यह भ्रम की स्थिति खत्म हो सके। साथ ही विधिक कार्रवाई के लिये नगर कोतवाली को सूचना दे दी गई है।