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शिवसेना ही नहीं, पहले भी टूटकर अलग हो चुके हैं कई दल, एकनाथ शिंदे ने 27 साल बाद दोहराया इतिहास

लखनऊ. शिवसेना के पहले भी कईं दलों में अपनी ही पार्टी के लोगों ने बगावत कर तख्तापलट किया था| 27 साल पहले का इतिहास देखे तो 1995 में जब फ़िल्मकार NT Ramarav ने आंध्र प्रदेश में TDP (तेलुगु देशम पार्टी) का गठन किया था और 9 महीने के अंदर ही मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब उन्ही के दामाद Chandrababu Naidu ने उनके खिलाफ बगावत कर सरकार से लेकर संगठन तक, हर जगह अपना दबदबा बना लिया था| उस वक़्त NT Ramarav को भी अपने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था| ठीक वैसे ही आज चंद्रबाबू नायडू की तर्ज पर एकनाथ शिंदे ने किया है और अब महाराष्ट्र के अगले सीएम होंगे। फर्क दोनों में बस इतना है शिंदे को उन्हें भाजपा का साथ मिला है, जबकि नायडू ने अपने दम पर सारा उलटफेर किया था।

महाराष्ट्र की शिवसेना (Shivsena)
शिवसेना में चौथी बार यह फूट पड़ी है। इस बार 39 से ज्यादा विधायकों ने ठाकरे परिवार को छोड़कर एकनाथ शिंदे के साथ जाने का फैसला किया है।

1991 में पहली बार फूट पड़ी थी जब Chhagan Bhujbal के साथ 8 विधायक शिवसेना से चले गए थे। उसके बाद 2005 में Narayan Rane ने शिवसेना के 10 विधायकों को अपने साथ शामिल किया था। फिर 2005 में जब Uddhav Thakre को पार्टी की कमान मिली तब Raj Thakre ने अकेले ही पार्टी को छोड़ दिया (बिना किसी विधायक को अपने साथ लिए) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (Maharashtra Navnirman Sena) का गठन किया|

आंध्र प्रदेश की TDP
1995 में एंटी रामाराव ने आंध्र प्रदेश में पहली गैर कांग्रेसी सरकार बनाई थी। और वह पहली बार में ही 1984 से 1989 के दौरान 8वीं लोकसभा में मुख्य विपक्षी दल बनने वाली पहली क्षेत्रीय पार्टी थी।

बिहार की LJP
बिहार के दिग्गज दलित नेता राम विलास पासवान का नवंबर 2000 में निधन होने के बाद, इनकी पार्टी (Jan Lokshakti Party) की कमान उनके बेटे चिराग पासवान को मिली। लेकिन चिराग ने जब NDA से नाता तोड़ अकेले दम पर बिहार विधानसभा चुनाव लड़ा तो उन्हें हार का सामना करना पड़ा| फिर पार्टी की स्थिति कमजोर होते देख 2021 में LJP के 6 में से 5 सांसदों ने चिराग पासवान के खिलाफ बगावत की और राम विलास पासवान के छोटे भाई Pashupati Paswan को LJP पार्ट का नेता माना और लोक सभा में पार्टी को दर्जा दिलाया|

पश्चिम बंगाल की TMC
26 वर्षों तक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) का सदस्य होने के बाद फायरब्रांड नेता Mamta Banerjee ने 1 जनवरी 1998 को पश्चिम बंगाल में ‘तृणमूल कांग्रेस’ का गठन किया। एक दशक से ज्यादा संघर्ष करने के बाद ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल से वामपंथी सरकार (leftist politics) को उखाड़ फेंका और
2011 के विधानसभा के चुनाव में जीत हासिल कर ममता पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी| वर्तमान में यह लोकसभा की चौथी सबसे बड़ी पार्टी है जिसमे 34 सीटें हैं| 2016 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने अपनी जीत को बरकरार रखा और चुनाव आयोग द्वारा राष्ट्रीय राजनीतिक दल के रूप में पार्टी को मान्यता हासिल कराई|

आंध्र प्रदेश की YSR Congress
2009 में हेलिकॉप्टर क्रैश में आंध्र प्रदेश के तत्कालीन CM YSR Reddy की मृत्यु होने के बाद उनके बेटे Jagan Mohan Reddy की कांग्रेस से कुछ खास निपटी नहीं| पहला, कांग्रेस ने इन्हे CM बनाने से इंकार कर दिया और दूसरा पिता की मृत्यु के बाद राज्य में श्रद्धांजलि यात्रा निकालने की अनुमति भी नहीं दी|
जिससे नाराज होकर 177 में से 170 विधायकों ने जगन मोहन रेड्डी को अपना समर्थन देते हुए YSR Congress के नाम से पार्टी की स्थापना की| फिर लगभग एक दशक के संघर्ष के बाद 2019 में जगन मोहन रेड्डी आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बने|

Janta Dal

अक्टूबर 1988 में VP Singh के नेतृत्व में जनता पार्टी, जनमोर्चा और लोकदल का विलय ‘जनता दल पार्टी’ में हो गया और 1989 में जनता दल पार्टी की सरकार बनी| लेकिन बीजेपी का समर्थन वापस होने के बाद वीपी सिंह की सरकार गिर गयी| जनता दल के 40 सांसदों के साथ मिलकर Chandrashekhar ने Samajwadi Janta Party बनायी और कांग्रेस के समर्थन से प्रधानमंत्री बने| लेकिन कांग्रेस का साथ छूटते ही यह सरकार चार महीने में ही गिर गयी|

फिर 1992 में चंद्रशेखर और Mulayam Singh में फूट पड गयी और इसी साल मुलायम सिंह ने पार्टी से अलग होकर अपनी खुद की पार्टी Samajwadi Party बनायी|

यूपी की RLD

जनता दल पार्टी से ही बगावत कर Chaudhary Ajit Singh ने अलग होकर Rashtriya Lok Dal नाम से नई पार्टी बनायी। जिसके बाद उत्तर प्रदेश से जनता दल पार्टी का अस्तित्व ही खत्म हो गया। हालांकि तीन दशक बाद होने के बावजूद, राष्ट्रीय लोक दल भी यूपी में बहुत अधिक प्रभाव नहीं बना पाई है। यह पार्टी केवल पश्चिमी यूपी के कुछ जिलों तक ही सीमित होकर रह गई है।

बिहार की JD(U)
जनता दल के कमजोर होने के कारण बिहार के मुख्यमंत्री Lalu Prasad Yadav का पार्टी पर प्रभाव बढ़ता देख George Fernandes और Nitish Kumar ने खुद को जनता दल से अलग कर Samta Party का गठन किया, जिसे अब Janta Dal United के नाम से जानते हैं। और समता पार्टी ने बिहार में बीजेपी के साथ गठबंधन कर लालू प्रसाद यादव के खिलाफ सियासी जंग लड़ी।

Sharad Pawar ने जब जनता पार्टी को गिराया, बाद में उसी का दामन थाम अपनी सरकार बनायी
1977 में कांग्रेस पार्टी, Congress (U) और Congress (I) में बंट गई थी। शरद पवार कांग्रेस (यू) में थे। पहले जनता पार्टी को रोकने के लिए दोनों दलों ने साथ मिलकर सरकार बनाई। लेकिन फिर 1978 में महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव में दोनों दलों ने अलग-अलग चुनाव लड़ा। लेकिन पवार ने कुछ ही महीनों कांग्रेस (यू) को भी तोड़ दिया और फिर से जनता पार्टी के साथ मिलकर नई सरकार बनाई और खुद मुख्यमंत्री बने|

Jyotiraditya Sindhiya ने जब कांग्रेस के 22 विधायकों के साथ बीजेपी का दामन पकड़ा

सत्तारूढ़ राजनीतिक दल कांग्रेस के बड़े नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 2020 में अपने 22 समर्थक विधायकों के साथ पार्टी छोड़ कमलनाथ सरकार को गिरा दिया| जिसके बाद सिंधिया ने अपने समर्थक विधायकों के साथ मिलकर भाजपा का दामन थाम लिया और राज्य में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार बनाई।