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कोरोना की तरह कहीं Monkeypox भी तो नहीं बरपाएगा कहर? जानें- क्या हैं लक्षण और गाइडलाइन

लखनऊ. Difference between Monkeypox and Covid-19: कोरोना संक्रमण से अभी पूरी दुनिया जूझ ही रही थी कि मंकी पॉक्स (monkey pox) नाम के नए वायरस ने फिर से पूरे विश्व में दहशत का मौहाल बना दिया है| इस वायरस से अब तक लगभग 70 देश प्रभावित हो चुके हैं और यह बड़ी ही तेजी से अपने पांव दुनिया भर के कई देशों में पसार रहा है| मंकी पॉक्स का पहला केस भी भारत में सबसे पहले बीते दिन केरल (kerala) राज्य में मिला, जहाँ से कोरोना की भी शुरुवात हुई थी| केंद्र सरकार ने इस पर अलर्ट मोड जारी करने के साथ कुछ निर्देशों को भी जारी किया है| आइये जानते हैं दोनों वायरस के बारे में और क्या है पूरा मामला-

मंकीपॉक्स क्या है? (what is monkeypox)
मंकी पॉक्स से शरीर और चेहरे पर दाने हो जाते हैं और यह बीमारी वायरस के कारण होती है| यह वायरस स्मॉल पॉक्स या चेचक की फैमिली का ही एक हिस्सा है|

मंकी पॉक्स की हिस्ट्री (history of monkey pox)
मंकी पॉक्स सबसे पहले 1958 में एक बंदर में पाया गया था| फिर 1970 में, जिससे यह 10 अफ़्रीकी देशों में फ़ैल गया था| 2022 में मंकी पॉक्स का पहला केस 6 मई को ब्रिटेन में मिला था| जिसके बाद इसके ऑउटब्रेक का असर देखते ही देखते 70 से ज्यादा देशों में फ़ैल गया है|

मंकीपॉक्स के लक्षण (symptoms of monkeypox)
मंकी पॉक्स होने पर मरीज को बुखार, सिर दर्द, पीठ दर्द, मांसपेशियों में दर्द, ठंड लगना, थकावट व लसीका ग्रंथि (lymph gland) में सूजन जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं| बुखार आने के 1 से 2 दिन में ही चेहरे पर दाने होने शुरू हो जाते हैं जो धीरे-धीरे पूरे शरीर में फैलने लगता है| यह दाने मवाद से भरे होते हैं|

मंकीपॉक्स वायरस और कोरोना वायरस में अंतर? (difference between monkeypox virus and corona virus)
WHO के अनुसार दोनों में सबसे बड़ा अंतर यही है कि मंकी पॉक्स एक इंसान से दूसरे इंसान में नहीं फैलता और न ही इसके फैलने की क्षमता covid-19 जितनी है| लेकिन अगर एक वजह खोजी जाये तो यह त्वचा से त्वचा के संपर्क में आने से फ़ैल सकता है| जबकि कोरोना वायरस सूक्ष्म से सूक्ष्म कण (खासी या छींक की बूंदों) से भी फ़ैल सकता है|

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मंकी पॉक्स एक डबल स्टैंडर्ड डीएनए है| जिसका मतलब यह है की यह वायरस अपने आकार में बड़ा और भारी है, जिससे दूर तक फैलने की इसकी क्षमता कम है| जबकि कोरोना वायरस एक सिंगल स्टैंडर्ड आरएनए है और इसके फैलने की क्षमता दूर तक व्यापक है|

कोरोना की तरह मंकी पॉक्स भी संक्रमित माँ से प्लेसेंटा के जरिये बच्चे को प्रभावित कर सकता है, पर इसकी दर अभी बहुत ही कम है|

मंकीपॉक्स के खिलाफ क्या है भारत सरकार की यात्रियों के लिए नयी गाइडलाइन (Indian government guidelines against monkeypox virus)
1) सबसे पहले तो विदेश से वापस आये लोगों को बीमार व्यक्तियों के संपर्क में आने से बचना होगा
2) यात्रियों को जंगली जानवरों का मीट नहीं खाने और अफ़्रीकी जानवरों से बना पाउडर, लोशन या क्रीम जैसे अन्य कॉस्मेटिक चीजों का उपयोग ना करने का निर्देश दिया है
3) संक्रमित या बीमार व्यक्ति के कपड़े, बर्तन या बिस्तर से दूर रहना
4) किसी भी तरह के जिन्दा या मर चुके जानवर और चूहे, गिलहरी, बंदर जैसे जानवरों के सम्पर्क से बचाव करना
5) मरीज को दूसरों से आइसोलेटेड रखें
6) मरीज की देखभाल करते समय PPE किट पहने

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मंकीपॉक्स से कैसे करें बचाव? (how to prevent from monkeypox)
जिन्होंने अभी पिछले 21 दिनों में मंकी पॉक्स से ग्रसित देशों की यात्रा की है उनसे उचित दूरी बना के रखें| खासकर उनसे जिनमे इस बीमारी के लक्षण मौजूद हैं| मरीज या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर बार-बार अच्छे से अपने हाथों को धुलें व पूरी सावधानी बरते| किसी भी तरह की समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह लें|

मंकीपॉक्स अपडेट? (monkeypox update)
मंकी पॉक्स के पूरी दुनिया में अब तक 11,634 मामले दर्ज हुए हैं| जिसमे भारत समेत अन्य 75 देश शामिल हैं|
स्पेन – 2487
जर्मनी – 1790 मामलें
यूनाइटेड किंगडम – 1735 मामले
अमेरिका – 1464 मामले
फ्रांस – 908 मामले
पुर्तगाल – 515
कनाडा – 485
ब्राज़ील – 317
इजराइल – 88
स्वीडन – 58
ऑस्ट्रेलिया – 28
मेक्सिको – 27
यूएई- 13
अर्जेंटीना – 12
भारत – 1

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