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Manyawar Kanshiram Smarak: 86 एकड़ में फैला है कांशीराम स्मारक स्थल, इसकी खूबसूरती आपका मन मोह लेगी

लखनऊ. Manyawar Kanshiram Smarak Sthal- अगर आप लखनऊ घूमना चाहते हैं और फेवरेट प्लेस की लिस्ट तैयार कर रहे हैं तो उसमें मान्यवर कांशीराम स्मारक स्थल का नाम भी जोड़ लीजिएगा। राजधानी में बना यह पर्यटन स्थल बेहद खूबसूरत है। लगभग 86 एकड़ में फैले इस स्मारक स्थल की खूबसूरती देखते ही बनती है। बौद्ध वास्तुकला के आधार पर निर्मित इस पार्क में देखने के लिए बहुत कुछ है। पूरे पार्क में ग्रेनाइट लगे हैं जो आंध्र प्रदेश और कर्नाटक से मंगाये गये थे। स्मारक स्थल में 1884 लाइटें लगी हैं जो रात में इसकी शोभा और बढ़ा देती हैं।

पार्क के बीचोबीच बना स्मारक हाल खास आकर्षण का केंद्र है। इसमें 18-18 फीट की कांशीराम और मायावती की ऊंची कांस्य प्रतिमा स्थापित हैं। ये प्रतिमायें खास धातु से बनी हैं जो हजारों वर्षों तक ऐसी ही बनी रहेंगी। यहीं पर अलग-अलग कांशीराम की छह विशाल कांस्य भित्तिचित्र यानी म्यूरल लगाई गई हैं। जिन्हें पढ़कर आप कांशीराम के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं के बारे में जान सकेंगे। हाल के गुंबद के अंदर तांबे की प्लेटें लगी हैं, जो उसे और खूबसूरत बनाती हैं। स्मारक के चारों तरफ 10 हाल हैं। प्रत्येक हॉल में रोशनी के लिए शीशे लगे हैं, जो कि बुलेटप्रूफ हैं। गुंबद के चारों तरफ गैलरी बनी है, जिसके जरिये आप एक स्थान से पूरे पार्क का नजारा ले सकते हैं। इसके मेन गेट में लकड़ी का बड़ा खूबसूरत दरवाजा लगा है, जिसकी ऊंचाई 28 फीट है। गुम्बद में राजस्थान के बलुआ पत्थर लगे हैं जो कई सौ वर्षों तक इसी तरह रहेंगे। स्मारक के चारों तरफ बाउंड्री वाल में लगे पत्थर मिर्जापुर के हैं।

गुम्बद की सुरक्षा के लिए बने हैं चार टॉवर
स्मारक हाल की सुरक्षा के लिए बाहर चारों कोनों पर टॉवर बने हैं, जबकि अंदर दो टॉवर बने हैं, जिनमें हर प्वाइंट पर सुरक्षा वाहिनी के जवान तैनात रहते हैं। हालांकि, देखरेख के अभाव में अब इन टॉवरों के छज्जों के पत्थर खिसक रहे हैं, जिनसे कभी भी हादसा हो सकता है।

आकर्षित करती है एलीफैंट गैलरी
30 हाथियों की एलीफैंट गैलरी आपको ठहरने पर विवश कर देगी। स्मारक हाल के सामने यानी दक्षिणी गेट के सामने की ओर 6-6 हाथी खड़े हैं, जबकि पूर्वी और पश्चिमी हाथी गैलरी में 9-9 हाथियों की कतार है। ये खूबसूरत हाथी खास धातु के बने हैं। जो बरबस ही आपका ध्यान अपनी को खींच लेंगे। और शायह ही आप सेल्फी लिए बिना रह पायें। स्मारक के बाईं और दाईं तरफ 30-30 फीट ऊंचे कांस्य के चार फव्वारे हैं। जो बेहद खूबसूरत व दर्शनीय हैं।

रोज वाटिका में मिलती हैं 21 तरह की जड़ी बूटियां
वैसे तो पूरे पार्क में पत्थर ही पत्थर हैं, लेकिन स्मारक हाल के ठीक पीछे दो रोज वाटिका हैं। एक पूर्वी और दूसरी पश्चिमी। यहां की हरियाली आपको रुकने पर विवश कर देगी। वाटिका की खासियत यह है कि इनमें 21 प्रकार की जड़ी बूटियां पाई जाती हैं। इन दोनों रोज वाटिका के बीच में विशालकाय 14 स्तंभ हैं, जिनकी ऊंचाई 25 फीट है। इन स्तंभों में चारों तरफ खास लाइटें लगी हैं जो रात के समय अद्भुत नजारा देती हैं। यहां की कई और खासियतें हैं जिन्हें यहां आकर ही आप जान पाएंगे।

दुनिया के सबसे महंगे आर्किटेक्ट जय कार्तिकेय ने बनाया था स्मारक स्थल
09 अक्टूबर 2007 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने कांशीराम स्मारक स्थल का शिलान्यास और 25 जून 2009 को इसका लोकार्पण किया था। कांशीराम स्मारक स्थल की नींव 70 फीट गहरी है जो शायद भारत के किसी भी ऐतिहासिक स्थल की नींव से कहीं ज्यादा है। इस स्थल को दुनिया के सबसे महंगे आर्किटेक्ट जय कार्तिकेय ने बनाया था। जमीन से इस गुम्बद की उंचाई 54 फीट है जबकि समुद्रतल से यह 65 मीटर ऊंचा है। स्मारक स्थल में एंट्री के लिए दो गेट हैं। हर गेट पर मेटल डेटेक्टर लगे हैं, जिनसे गुजरकर ही पार्क में एंट्री मिलेगी। स्मारक स्थल के अंदर दो प्लाजा भी हैं, जिन्हें पूर्वी व पश्चिमी प्लाजा कहा जाता है। यहां शौचालय व पेयजल की बेहतर व्यवस्था है। स्मारक स्थल में प्रवेश के लिए प्रति व्यक्ति एंट्री टिकट 15 रुपए का है।

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