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आखिर ऐसा क्या था Video में जो फांसी लगाने को मजबूर हुए Mahant Narendra Giri, जानें- साजिश की पूरी कहानी

प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष Mahant Narendra Giri को आत्महत्या के लिए उनके ही शिष्य Anand Giri ने मजबूर किया था। CBI की चार्जशीट के मुताबिक, आनंदगिरि की ब्लैकमेलिंग से नरेंद्र गिरि इतना परेशान हो गये थे कि उन्हें सुसाइड जैसा कदम उठाना पड़ा। आनंद गिरि कथित अश्लील वीडियो वायरल करने की महंत को देता था। 23 मई को उसने निरंजनी अखाड़े के सचिव नरेंद्र पुरी और नरेंद्र गिरि से कॉन्फ्रेंस कॉल की थी जो दोनों के बीच सुलह कराने की कोशिश कर रहे थे। कॉन्फ्रेंस कॉल में आनंद गिरि ने रवींद्र पुरी से कहा था कि महंत का एक वीडियो भेजूंगा जिसे देखते ही पैरों तले जमीन खिसक जाएगी। कथित Ashleel Video के नाम पर महंत नरेंद्र गिरि को डराने का सिलसिला यहीं से शुरू हुआ। महंत नरेंद्र गिरि केस में दाखिल चार्जशीट का संज्ञान लेते हुए सीजेएम कोर्ट 25 नवम्बर को सुनवाई करेगा।

बताया जा रहा है कि महंत नरेंद्र गिरि से विवाद के बाद आनंद गिरि हरिद्वार चला गया और तब से मठ में वापसी के लिए साजिश रच रहा था। इस दौरान उन्होंने आनंद गिरि ने महंत रवींद्र पुरी से फोन पर बातचीत की, कॉन्फ्रेंस में नरेंद्र गिरि भी थे, जिसकी Call Recording भी कर ली गई थी। Confrence Call के दौरान आनंद गिरि ने महंत को धमकाते हुए कहा था कि उसके पास ऐसा वीडियो है, जिसके वायरल होते ही पैरों तले जमीन खिसक जाएगी। जांच के दौरान यह ऑडियो सीबीआई के हाथ लगा, जिसके बाद ही यह पता चल सका कि महंत नरेंद्र गिरि को ब्लैकमेल किया जा रहा था। चार्जशीट दाखिल करने से पहले सीबीआई ने आनंद गिरि की Voice Sample लेकर उसका विधिविज्ञान प्रयोगशाला में मिलान कराया है।

इन तीन लोगों ने देखा था कथित अश्लील वीडियो
Anand Giri जिस कथित अश्लील वीडियो को दिखाने की धमकी देकर महंत नरेंद्र गिरि को धमका रहा था, उस वीडियो को तीन लोगों ने देखा था। इनमें प्रयागराज का एक और हरिद्वार के दो शख्स शामिल हैं। छानबीन में पता चला है कि Sucide से पहले महंत नरेंद्र गिरि ने इस वीडियो के बारे में वाराणसी के संत संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा से फोन पर बातचीत की थी और उन्हें बताया कि आनंद गिरि ने एक कंप्यूटरीकृत वीडियो तैयार किया है, जिसे वह इंटरनेट पर वायरल कर देगा। सीबीआई ने इस आपत्तिजनक वीडियो को बरामद कर लिया है या नहीं, फिलहाल CBI Chargesheet में इस बात का जिक्र अभी तक नहीं किया गया है।

महंत के सुसाइड नोट में क्या था?
प्रयागराज अल्लापुर स्थित Baghambari Math के एक कमरे में 20 सितंबर को महंत नरेंद्र गिरि का पंखे से लटकता शव मिला था। लाश के पास से एक सुइसाइड नोट भी बरामद हुआ था, जिसमें उन्होंने अपनी मौत के लिए कथित तौर पर आनंद गिरि, Aadya Prasad Tiwari और उनके बेटे संदीप तिवारी को जिम्मेदार ठहराया था। उस सुसाइड नोट में लिखा था कि उन्होंने पूरा जीवन सम्मान के साथ जिया और उनके दामन में कभी किसी तरह का दाग नहीं रहा लेकिन कुछ लोगों ने उनपर मिथ्या आरोप लगाकर उन्‍हें अपमानित किया, जिससे वह बेहद दुखी हैं। मामले में तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया था। मामले की जांच सीबीआई कर रही है।

आनंद गिरि और महंत नरेंद्र गिरि के विवाद की जड़?
परिवार से संबंध रखने और मठ-मंदिर के धन के दुरुपयोग के आरोप में Mahant Narendra Giri ने आनंद गिरि को पहले मठ बाघंबरी गद्दी और त्रिवेणी बांध स्थित बड़े हनुमान मंदिर के व्यवस्थापक पद से हटा दिया गया था। इसके बाद आनंद गिरि ने भी महंत पर कई आरोप लगाये। 13 दिनों तक चले इस विवाद का पटाक्षेप आनंद गिरि के माफीनामे के साथ हुआ था। आनंद गिरि ने विवाद के 14वें दिन अपने गुरु महंत नरेंद्र गिरि के पांव पकड़कर उन पर लगाए गए आरोपों, बयानों को वापस लेते हुए अपने किए और कहे के लिए माफी मांग ली थी। इसके बाद महंत ने आनंद गिरि को मठ बाघंबरी गद्दी में आने और पूजन करने पर लगा प्रतिबंध हटा लिया था, लेकिन इसके बाद से आनंद गिरि फिर कभी भी पहले की तरह अपने गुरु के समीप नहीं जा सका।

आद्या तिवारी और महंत नरेंद्र गिरि में क्या था विवाद
सवाल उठता है कि महंत नरेंद्र गिरि को ब्लैकमेल करने में Aadya Prasad Tiwari और संदीप तिवारी ने क्यों साथ दिया और कौन थे ये दोनों?प्रयागराज नैनी के अरैल निवासी आद्या प्रसाद तिवारी हनुमान मंदिर में वर्षों से पुजारी है। मंदिर में ही उसका बड़ा बेटा Dileep Tiwari प्रसाद और छोटा बेटा संदीप तिवारी फूल माला की दुकान चलाता था। महंत नरेंद्र गिरि और आनंद गिरि के विवाद के दौरान संदीप मठ और मंदिर में होने वाली गतिवधियों के बारे में आनंद को बताता था। इसकी भनक नरेंद्र गिरि को लगी तो उन्होंने आद्या से पुजारी मंदिर के पुजारी का पद और दोनों बेटों से दुकान छीन ली। अगले ही दिन आद्या ने महंत से माफी मांग ली थी। कुछ दिनों बाद उसे दोबारा पुजारी के पद पर बहाल कर दिया गया था लेकिन, तमाम अधिकार छीन लिए गए जिसमें जिसमें दान के पैसों का हिसाब किताब भी शामिल था। हनुमान मंदिर के अधिकार छीने जाने से आद्या तिवारी व संदीप तिवारी महंत से नाराज था और इसीलिए वह पूरी तरह से आनंद गिरि के पक्ष में आ गया था। Sandip Tiwari ने ही चारों तरफ प्रचारित किया था कि महंत नरेंद्र गिरि का एक आपत्तिजनक वीडियो आनंद गिरि के पास है। इससे संबंधित कई ऑडियो क्लिप सीबीआई को मिले हैं, सीबीआई ने चार्जशीट में विस्तार से इन बातों का उल्लेख भी किया है।