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बाराबंकी के एक किसान का देसी जुगाड़, महंगे डीजल की टेंशन को करेगा खत्म, आधे खर्च में इंजन से खेत सींचने का निकाला नायाब तरीका

बाराबंकी. एक तरफ जहां बढ़ते डीजल और पेट्रोल के दामों पर लगाम नहीं लगा पा रही है, तो दूसरी तरफ इन बढ़ती कीमतों से आम आदमी के साथ किसान सबसे ज्यादा परेशान है। तेल की कीमतों की वजह से बढ़ती महंगाई न सिर्फ आम जनता का ही बजट नहीं बिगाड़ रही, बल्कि इसका असर खेती और उन सभी व्यवसायों पर भी पड़ रहा है जो पेट्रोल और डीजल पर निर्भर हैं। तो वहीं तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर लोग निराश और परेशान हैं। लेकिन ऐसे में बाराबंकी के एक किसान ने जरूर अपने देसी जुगाड़ से बाकी किसानों में उम्मीद की किरण जगाई है। किसान ने अपने पंपिंग सेट में एक ऐसा देसी जुगाड़ फिट किया है, जिससे न सिर्फ महंगे डीजल की टेंशन खत्म हो जाएगी। बल्कि केवल आधे खर्च में ही किसान अपने खेतों की सिंचाई कर सकेंगे।


किसान का देसी जुगाड़
पूरा मामला बाराबंकी के विकासखंड सूरतगंज में स्थित मसुरिहा गांव से जुड़ा है। जहां के एक किसान राजेंद्र प्रसाद ने अपने पंपिंग सेट में एक एकदम देसी जुगाड़ फिट किया है। किसान राजेंद्र ने डीजल की बढ़ती कीमतों की समस्या से निजात पाकर अपने खेतों को सींचने के लिए एक नया और नायाब तरीका इजाद किया है। किसान राजेंद्र ने अपने पंपिंग सेट को एलपीजी गैस से चला रहे हैं। जिसकी क्षेत्र के साथ-साथ अब पूरे जिले में जमकर प्रशंसा हो रही है। साथ ही दूर-दूर से किसान यहां आकर राजेंद्र के पंपिंग सेट में लगे इस देसी जुगाड़ को देख और समझ रहे हैं। राजेंद्र के इस जुगाड़ से एक तरफ जहां आधे से भी कम खर्च में पंपिंग सेट चलता हैं, तो दूसरी तरफ पंपिंग सेट कार्बन युक्त धुआं नहीं देता और यह प्रदूषण मुक्त रहता है।

केवल 5वीं तक पढ़े हैं राजेन्द्र
लगभग 34 वर्षीय किसान राजेंद्र प्रसाद ने, वैसे तो केवल कक्षा 5 तक की ही शिक्षा ग्रहण की है। लेकिन उन्होंने जिस देसी जुगाड़ से अपने पंपिंग सेट को चलाया है, उसको शायद अच्छे पढ़े लिखे इंसान के लिये समझना भी मुश्किल होगा। दरअसल राजेंद्र ने अपने पंपिंग सेट में एक गैस सिलेंडर फिट किया है। पंपिंग सेट में सिलेंडर फिट करने के लिये भी राजेंद्र ने एक खाली डिब्बे, पाइप, रेग्युलेटर और साइकिल की वॉलबाडी का इस्तेमाल किया है। जिसके बाद राजेंद्र का पंपिंग सेट डीजल और गैस दोनों से चलता है। लेकिन एक घंटे डीजल से इंजन चलाकर सिंचाई में जितना भी खर्च पहले आता था, राजेंद्र के इस जुगाड़ के बाद वह ठीक आधा हो गया है। राजेंद्र के मुताबिक इस तकनीक से उनका पंपिंग सेट डीजल पर स्टार्ट होता है, उसके बाद एलपीजी गैस पर चलता रहता है। बीच-बीच में वह थोड़ा-थोड़ा डीजल लेता रहता है।

महंगे डीजल की टेंशन खत्म
राजेंद्र के मुताबिक आए दिन बढ़ते डीजल के दामों को देखते हुए उन्होंने अपने खेतों की पर्याप्त सिचाई के लिए यह नई तकनीक खोजी है। राजेंद्र ने बताया कि जैसे चूल्हे में एलपीजी गैस सिलेंडर फिट होता है और रेग्युलेटर के इस्तेमाल से वह जलता है। ठीक उसी तरह उन्होंने पंपिंग सेट के स्लेटर में रेगुलेटर और पाइप के माध्यम से गैस सिलेंडर लगाया है। जिससे वह अपना पंपिंग सेट चलाते हैं। राजेंद्र ने बताया कि पहले वह एक घंटे पंपिंग सेट चलाते थे तो करीब सवा लीटर डीजल जल जाता था और 115 से 120 रुपये का खर्च आता था। लेकिन अब एक घंटे पंपिंग सेट चलाने पर केवल 400 ग्राम डीजल और 250 ग्राम गैस खर्च होती है। इन दोनों को मिलाकर लागत 45 से 50 रुपये आती है। यानी आधे से भी कम खर्च में अब वह पंपिंग सेट चलाते हैं। राजेंद्र ने बताया कि इस तरीके से जहां प्रति घंटे करीब 40 से 50 रुपये की बचत हो जाती है, वहीं पंपिंग सेट को गैस से चलाए जाने से पंपिंग सेट कार्बन युक्त धुआं नहीं देता और यह प्रदूषण मुक्त रहता है।

बाकी किसान भी खुश
वहीं किसान रादेंद्र प्रसाद के पिता राम सागर भी अपने बेटे के देसी जुगडा से काफी खुश हैं। राम सागर का कहना है कि राजेंद्र द्वारा इजाद की गई तकनीक का प्रयोग अगर हर किसान करने लगे तो उसकी खेतों की सिंचाई का खर्च आधा हो जाएगा। जिससे एक तरफ यह किसान भाइयों के चेहरे पर खुशी आएगी। तो वहीं दूसरी तरफ पंपिंग सेट से निकलने वाले कच्चे धुएं से फैलने वाले प्रदूषण पर भी रोक लग सकेगी। वहीं राजेंद्र के इस देसी जुगाड़ को देखने और समझने के लिये दूर-दूर से किसान यहां आ रहे हैं और इस तकनीक को खुद भी इस्तेमाल करने की बात कह रहे हैं।