Wednesday , February 8 2023

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आशा आयुर्वेदा की पहल, डॉ. चंचल शर्मा ने महिलाओं को बताया स्वस्थ व सफल जीवन का राज

लखनऊ. अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आशा आयुर्वेदा ने इस साल महिला दिवस 2022 की थीम ‘जेंडर इक्वालिटी टुडे फॉर ए सस्टेनेबल टुमारो’ (“Gender equality today for a sustainable tomorrow”) पर भी चर्चा की है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की थीम पर आशा आयुर्वेदा की फर्टिलिटी एक्सपर्ट ने कहा कि महिला और पुरुष दोनों को बराबर सामान अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को यह समझने की भी बहुत आवश्यकता है। कि आपको स्वयं स्वस्थ रहना है। क्योंकि यदि आप खुद स्वस्थ नहीं हैं। तो आप कैसे स्वस्थ समाज की नींव रख पाएंगी। उन्होंने कहा कि एक स्थाई कल के लिए आज लैंगिक समानता बहुत जरूरी है। ऐसे में महिलाओं के अधिकारों को मजबूती मिलेगी। महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं।

डॉ. चंचल शर्मा ने बताया कि अनियंत्रित जीवनशैली के कारण महिलाओं में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ रहा है। जिसके कारण महिलाओं की फर्टिलिटी भी प्रभावित होती है। आज पूरे भारत में 40 प्रतिशत महिलाओं की इनफर्टिलिटी की समस्या है। जिसके कारण वह कंसीव नही कर पाती है। महिला इनफर्टिलिटी की समस्या में ट्यूबल ब्लॉकेज एक बहुत बड़ा कारण है। जिसके लिए चंचल शर्मा एक विशेष कार्यक्रम चला रही है। “निःसंतानता भारत छोड़ो” और इसमें आशा आयुर्वेदा की पूरी टीम काम कर रही है। और इसमें आशा आयुर्वेदा को अच्छा सफलता भी प्राप्त हुई है।

महिला स्वास्थ्य को ये करते हैं प्रभावित?

महिलाओं को बचपन से कुछ ऐसे कारक है जो प्रभावित करने लगते हैं।
महिलाओं को बचपन से ही सही पोषण न मिल पाना।
एनीमिया
शारीरिक कमजोरी
गर्भावस्था में सही पोषण और देखभालल की कमी।
प्रसव के दौरान बहुत सारी जटिलताएं।
मासिकधर्म में अनिमितता और समस्याएं।
नियमित व्ययाम न करना।
मानसिक थकावट और तनाव
स्तन कैंसर व प्रजनन अंगों के कैंसर
यह सभी कारक महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए बहुत बड़ी समस्या है।

महिलाओं के लिए जरूरी बात
महिलाओं को कौन-कौन सी एक्सरसाइज करनी है। इससके लिए स्त्री विशेषज्ञ से समय पर जरुर मिलें। तभी आप खुद को और अपने परिवार को स्वस्थ रख पाएंगी।स्वस्थ जीवनशैली का पालन पूरी सजकता के साथ अपनाएं और खानपान का भी विशेष ध्यान रखें। आयुर्वेद के इन सभी नियमों का पालन करने से बीमारियों का खतरा कम होगा और आपका स्वास्थ्य ठीक रहेगा। भारत में प्रसव के बाद 53 प्रतिशत महिलाओं में खून की कमी अर्थात एनीमिया की समस्या होती है। इसलिए प्रेगनेंसी के पूर्व और प्रेगनेंसी के दौरान पौष्टिक एवं संतुलिए आहार का पूरी सजकता से पालन करें।