Tuesday , February 7 2023

Sawal To Banta Hai: किसकी शह पर फल-फूल रहा है जहरीली शराब का कारोबार?

आजमगढ़. उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के अहरौला थाना क्षेत्र में मौत का मातम पसरा है। यहां जहरीली शराब पीने से अब तक 10 से ज्यादा की मौत हो चुकी है जबकि तीन दर्जन से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से कुछ की हालत हालत गंभीर है। हालांकि, प्रशासन ने पांच के ही मरने की पुष्टि की है। आजमगढ़ के अहरौला थाना क्षेत्र के माहुल कस्बे में उस वक्त अफरातफरी मच गई जब जहरीली शराब पीने से एक के एक एक 46 लोग बीमार हो गये। आनन-फानन में सभी को अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब तक 10 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है जबकि मंगलवार तक प्रशासन ने पांच के ही मरने की पुष्टि की है। मामले में पुलिस ने अब तक पांच लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किये हैं, जिनमें से चार को गिरफ्तार कर लिया गया है।
आबकारी विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय भूसरेड्डी ने बताया कि आजमगढ़ में आबकारी विभाग के निरीक्षक नीरज सिंह, आबकारी आरक्षक सुमन कुमार पाण्डेय और राजेंद्र प्रताप सिंह को निलंबित किया गया है। इन सभी के खिलाफ विभागीय जांच के निर्देश भी दिये गये हैं। साथ ही थानाध्यक्ष के खिलाफ कार्यवाही के लिये शासन को कहा गया है। घटना के विरोध में सोमवार को लोग सड़क पर उतर आए। गुस्साए लोगों ने दिन में दो बजे से साढ़े तीन बजे तक धरना-प्रदर्शन करते हुए सड़क जाम रखा।

आजमगढ़ जिले में इससे पहले भी जहरीली शराब के सेवन से कई लोगों की जान जा चुकी हैं। साल 2002 में बरदह क्षेत्र के इरनी गांव में नकली शराब पीने स 11 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। 2013 में मुबारकपुर क्षेत्र में 53 लोग असमय काल के गाल में समा गए थे। 2017 में सगड़ी क्षेत्र में 36 लोग मौत की नींद सो गए। वहीं, बीते साल 2021 में पवई व दीदारगंज क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से 22 लोगों की मौत हो गई थी। पिछले दो दशक में नकली शराब से होने वाली घटनाओं में अब तक 150 के करीब लोगों की मौत हो चुकी है।

पहले भी जहरीली शराब ने ली है जान
प्रदेश की बात करें तो 2021 में प्रयागराज के फूलपुर में 6 लोगों की जहरीली शराब पीने से जान चली गई थी। 2021 में ही लखनऊ, मेरठ और बागपत जहरीली शराब पीने से आधा दर्जन की मौत हो गई थी। 2020 में कानपुर सहित कई जिलों में करीब 25 लोगों की मौत हो गई थी। इससे पहले 2019 में सहारनपुर और कुशीनगर में दर्जनों लोग मौत की नींद सो गये थे। 10 वर्ष पहले की बात करें तो 2009 में सहारनपुर में 32, 2010 में वाराणसी में 20, 2016 में लखनऊ में 36 और साल 2016 में ही एटा में 41 लोगों की जान गई थी।

शराब में मिलावट का खेल बदस्तूर जारी
हर बार शराब से हुईं मौतों पर हंगामा होता है। कुछ लोगों पर कार्रवाई भी होती है। कुछ को निलंबित कर दिया जाता है। कुछ जेल भी जाते हैं। लेकिन, लगातार हो रहे हादसे बताते हैं कि शराब में मिलावट का खेल बदस्तूर जारी है। कार्रवाई सिर्फ तात्कालिक होती है जबकि बोतलों में नकली शराब भरने का खेल जारी रहता है। ऐसे में सवाल तो बनता है कि आखिर मिलावट के इस खेल पर लगाम कब लगेगी?

मामले पर राजनीति शुरू
यूपी कांग्रेस इलेक्शन कैंपेन कमेटी के चेयरमैन पीएल पुनिया ने आजमगढ़ में जहरीली शराब से मौतों को लचर कानून-व्यवस्था का नतीजा करार दिया। कहा कि आजमगढ़ में जहरीली शराब से हुई मौतें उत्तर प्रदेश में तार-तार हुई क़ानून व्यवस्था का एक और नमूना है। सरकार को इसके जिम्मेदारों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं, आजमगढ़ शराब कांड के मुख्य आरोपित रंगेश यादव की गिरफ्तारी सपा नेता व पूर्व सांसद रमाकांत यादव के घर से होने पर केंद्रीय मंत्री व भाजपा के यूपी चुनाव के सह प्रभारी अनुराग ठाकुर ने अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा- ‘अखिलेश तेरे चार यार, गुंडे अपराधी माफिया और भ्रष्टाचार।’

सवाल तो बनता है?
अगर आपके कानों तक मृतकों के परिजनों का करुण क्रंदन पहुंचा तो आपका भी दिल पसीज जाएगा.. यकीनन आप भी उन्हें श्रद्धांजलि ही देंगे। लेकिन, सोचिये क्या यह काफी है? हर बार ऐसा क्यों होता है? इस समस्या को जड़ से क्यों नहीं खत्म किया जाता? क्यों हर बार लीपापोती होती है? और जब नया हादसा होता तो हम पुराने को भी याद करते हैं.. कि काश तब शिकंजा कस लिया गया होता तो अब ऐसा नहीं होता?