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धरने पर बिजली विभाग के सवा लाख ठेका मजदूर, चेतावनी- नहीं पूरी हुईं मांग तो करेंगे वोट की चोट

लखनऊ. उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन निविदा/संविदा कर्मचारी संघ बीते चार महीनों से अपनी सात-सूत्रीय मांगों को लेकर राजधानी लखनऊ के इको गार्डन में धरने पर बैठा है। The NH Zero की टीम से खास बातचीत में संघ के महामंत्री देवेंद्र कुमार पांडेय ने कहा कि बिजली विभाग निविदा कर्मचारियों से सौतेला व्यवहार कर रहा है। इस दौरान उन्होंने Power Corporation में बड़े ईपीएफ घोटाले की ओर इशारा भी किया। कहा कि घोटाले की जांच होगी, तो बिजली विभाग में यूपी का सबसे बड़ा घोटाला सामने आएगा। वेतन के रूप में power corporation बहुत बड़ा घपला कर रहा है। देवेंद्र कुमार पांडेय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनकी मांगों पर ध्यान देने की अपील की। साथ ही चेतावनी दी कि अगर सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो प्रदेश भर बिजली घरों में काम कर रहे सवा लाख निविदा कर्मचारी और उनका परिवार वोट की चोट करेगा।

क्या हैं इनकी मांगें?
1- आउटसोर्सिंग के माध्यम से कर्मचारियों को न्यूनतम मजदूरी 18000 रुपए निर्धारित कर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा समय-समय पर दिए जाने वाले हित लाभों को दिया जाए।
2- आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को विभाग की नीतियों के अनुरूप मस्टरोल व्यवस्था के तहत समायोजित कर समान कार्य का वेतन दिया जाए।
3- आउटसोर्स कर्मचारियों के ईपीएफ व इएसआई में हुए घोटाले की जांच कराई जाए।
4- आउटसोर्स कर्मचारियों की हो रही दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाते हुए कार्य के दौरान घायल कर्मचारियों को पूर्ण उपचार कराया जाए तथा परिवार के भरण पोषण हेतु उपचार अवधि का वेतन दिया जाए।
5- आउटसोर्स कर्मचारियों के परिजनों को दुर्घटना हितलाभ के रूप में 10 लाख रुपए की अनुग्रह धनराशि दी जाए। साथ ही परिवार के एक सदस्य को विभाग की सेवा में लिया जाए।
6- आउटसोर्स कर्मचारियों को पेट्रोल व मोबाइल भत्ता दिया जाए।
7- आउटसोर्स कर्मचारियों के कार्य से हटाने तथा स्थानांतरण के नाम पर की जा रही धन उगाही की जांच कराई जाये।

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