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UP Elections 2022: पूर्वांचल की इन 17 सीटों पर कभी नहीं जीती भाजपा, क्या इस बार विपक्ष का चक्रव्यूह भेद पाएंगे योगी?

लखनऊ. UP Elections 2022- उत्तर प्रदेश में अब तक 292 सीटों पर मतदान हो चुका है। छठे चरण का मतदान जारी है और सातवें व अंतिम चरण की वोटिंग 07 मार्च को होगी। 10 फरवरी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ चुनावी दंगल अब पूर्वांचल की जमीं पर लड़ा जा रहा है। 2017 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने अकेले दम पर पूर्वांचल की 111 में से 75 सीटों पर जीत दर्ज की थी जबकि सहयोगी पार्टी अपना दल को 05 और सुभासपा को 04 सीटें मिली थीं। यहां पूरी तरह से विपक्षी दलों का सूपड़ा साफ हो गया था। लेकिन पूर्वांचल के 8 जिलों की 17 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जिन पर आज तक कमल नहीं खिला। मोदी लहर में भी विपक्षी दलों को यहां बड़ी जीत मिली। इस बार बीजेपी के सामने अपनी जीती हुई सीटें बचाने साथ ही विपक्ष के ‘दुर्ग’ में सेंध लगाने की चुनौती है, जबकि सपा-बसपा और कांग्रेस ने बीजेपी को घेरने की मजबूत रणनीति तैयार की है।

आजमगढ़ जिले में 10 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से 07 सीटें ऐसी हैं जिन पर भाजपा कभी भी चुनाव नहीं जीत पाई। इनमें हैं- आजमगढ़ सदर, गोपालपुर, सगड़ी, मुबारकपुर, अतरौलिया, निजामाबाद और दीदारगंज। इसके अलावा गोरखपुर की चिल्लूपार विधानसभा सीट, देवरिया की भाटपार रानी विधानसभा सीट, जौनपुर की मछलीशहर और मल्हनी विधानसभा सीट, मऊ जिले की मऊ सदर विधानसभा सीट, गाजीपुर की जंगीपुर और जखनिया विधानसभा सीट, बलिया की बांसडीह विधानसभा सीट पर अब तक बीजेपी का खाता नहीं खुला है। इसके अलावा प्रदेश की 403वीं विधानसभा सीट यानी सोनभद्र जिले की दुद्धी सीट पर कभी कमल नहीं खिला है। 2017 में इस सीट पर भाजपा की सहयोगी पार्टी अपना दल के हरिराम जीते थे।

योगी के सामने दोहरी चुनौती
विपक्ष की अजेय सीटों को जीतने लिए इस बार भाजपा ने नये सिरे से रणनीति बनाई है, लेकिन सपा, बसपा और कांग्रेस की मजबूत मौजूदगी में यह आसान नहीं दिखता। विपक्षी दलों के चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए बीजेपी ने योगी को गोरखपुर से चुनाव मैदान में उतारा है। पूर्वांचल में ही उनका असली इम्तिहान भी है। यहां उन्हें खुद तो अच्छे नंबरों से पास होना ही है, पड़ोसी जिलों के उम्मीदवारों को भी जिताना है।

गोरखपुर सबसे हॉट सीट
छठे चरण में गोरखपुर सदर विधानसभा सीट यूपी की सबसे हॉट सीट में से एक है। योगी के सामने विपक्ष के 11 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इनमें सपा ने भाजपा से आईं शुभावती शुक्ला, बसपा ने ख्वाजा शम्सुद्दीन और कांग्रेस ने चेतना पांडेय को मैदान में उतारा है। वहीं, भीम आर्मी के जरिए आंदोलनों से चमके चंद्रशेखर भी योगी खिलाफ जीत का दावा कर रहे हैं।

छोटे दलों की कसौटी पूर्वांचल में ही
पूर्वांचल में ही छोटे दलों की भी असली कसौटी होगी। इसके अलावा बागियों के सामने प्रतिष्ठा बचाने की भी चुनौती होगी। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे स्वामी प्रसाद मौर्या और दारा सिंह चौहान, चुनाव से ठीक पहले सपा के साथ मिले गये। पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह भी ने चुनाव से पहले हाथ का साथ छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था। अब उनके सामने खुद को साबित करने की चुनौती है। इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी ने भी पूर्वांचल में बागियों पर दांव लगाया है।

10 मार्च को आएंगे चुनावी नतीजे
फिलहाल उत्तर प्रदेश का चुनावी समर आखिरी दौर में पहुंच चुका है। हार जीत की अटकलें शुरू गई हैं। सभी अपनी-अपनी पार्टी की जीत के दावे कर रहे हैं, हकीकत 10 मार्च को पता चलेगी, जब चुनावी नतीजे आएंगे।