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बाराबंकी में भाजपा ने एक विधायक का काटा टिकट, तीन पर फिर जताया भरोसा, क्या इस बार सदर सीट पर खिल पायेगा कमल?

लखनऊ. भारतीय जनता पार्टी (Bhartiya Janta Party) ने बाराबंकी जिले की सभी छह विधानसभा सीटों पर अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। बाराबंकी की रामनगर, दरियाबाद और कुर्सी से तो भाजपा ने वर्तमान विधायकों को ही एक बार फिर मौका दिया है, लेकिन हैदरगढ़ सीट से विधायक बैजनाथ रावत का टिकट भाजपा ने काट दिया है। बैजनाथ रावत का टिकट काटकर बीजेपी ने यहां से नए चेहरे पर दांव लगाया है। इसके अलावा बाराबंकी की सदर विधानसभा सीट से भी बीजेपी ने नए चेहरे पर भरोसा जताया है और जिला उपाध्यक्ष अरविंद मौर्य को यहां से टिकट दिया है। अरविंद मौर्या को टिकट देकर भाजपा ने पिछड़ी जातियों को साधने की कोशिश की है। इसके अलावा वहीं जैदपुर विधानसभा सीट से भाजपा ने 2019 के उपचुनाव में उप विजेता रहे अमरीश रावत को एक बार फिर मौका दिया है।

शरद अवस्थी ने छात्र राजनीति से शुरू की सियासी पारी
बाराबंकी की रामनगर विधानसभा सीट (Ramnahar Vidhan Sabha Seat) से भारतीय जनता पार्टी के वर्तमान विधायक और 2022 के विधानसभा चुनाव (UP Election 2022) के लिये एक बार फिर प्रत्याशी बने शरद कुमार अवस्थी (Sharad Kumar Awasthi) ने छात्र जीवन से ही अपनी राजनीति का सफर शुरू किया था। शरद कुमार अवस्थी ने बाराबंकी के जवाहर लाल नेहरू स्मारक महाविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव से राजनीति शुरू की। इसके बाद वह भाजपा युवा मोर्चा और मुख्य संगठन में कई पदों पर रहे। साल 2017 में रामनगर विधानसभा सीट से उन्होंने सपा के पूर्व मंत्री और कद्दावर नेता अरविंद कुमार सिंह गोप को हराकर जीत हासिल की थी। इसी को देखते हुए भाजपा ने शरद अवस्थी को एक बार फिर मौका दिया है। हालांकि शरद अवस्थी की उनके विधानसभा क्षेत्र में स्थिति अभी भी काफी मजबूत है और वह विरोधियों के लिये बड़ी मुसीबत बन सकते हैं।

सतीश शर्मा ने भी किया राजनीतिक संघर्ष
बाराबंकी की दरियाबाद विधानसभा सीट (Dariyabad Vidhan Sabha Seat) से प्रत्याशी बनाए गए सतीश चंद्र शर्मा को भाजपा ने दूसरी बार दरियाबाद विधानसभा सीट से मैदान में उतारा है। सतीश चंद्र शर्मा (Satish Chandra Sharma) ने भाजपा युवा मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष के पद से अपनी सियासी पारी की शुरुआत की थी। इसके बाद वह अलग-अलग पदों पर रहे। 2010 और 2015 में वह सिद्धौर से जिला पंचायत सदस्य चुने गए। साल 2017 में उन्होंने 1,19,800 वोट पाकर छह बार के दरियाबाद विधायक रहे राजीव कुमार सिंह को करीब पचास हजार वोटों से शिकस्त देकर शानदार जीत हासिल की थी। सतीश शर्मा बाराबंकी जिले में सबसे ज्यादा वोटों से जीतने वाले विधायक थे। इसी रिकॉर्ड को जेखते हुए भाजपा ने उन्हें एक बार फिर यहां से मौका दिया है। सतीश शर्मा इस बार भी विरोधियों की टंशन बढ़ाएंगे, क्योंकि क्षेत्र की जनता उनके काम से काफी संतुष्ट है और वह चुनाव में किसी भी मामले में हल्के नहीं पड़ेंगे।

साकेंद्र वर्मा पर भाजपा ने फिर दिखाया भरोसा
वहीं बाराबंकी की कुर्सी विधानसभा सीट (Kursi Vidhan Sabha Seat) से विधायक साकेंद्र प्रताप वर्मा (Sakendra Pratap Verma) को भाजपा ने दोबारा मैदान में उतारा है। 2017 में साकेंद्र वर्मा ने सपा सरकार में मंत्री रहे फरीद महफूज किदवई को करारी शिकस्त देकर अपनी सियासी पारी की शुरूआत की थी। साकेंद्र प्रताप वर्मा मूल रूप से सीतापुर जिले के महमूदाबाद के रहने वाले हैं। वह विधायक पहले एक शिक्षक थे।

अरविंद के लिये आसान नहीं होगी चुनौती
इन सबके साथ बाराबंकी की सबसे अहम सीट बाराबंकी सदर (Barabanki Sadar Vidhan Sabha Seat) से भाजपा ने अरविंद कुमार मौर्य (Arvind Kumar Maurya) को प्रत्याशी बनाया हा। वह जिला उपाध्यक्ष भी हैं। अरविंद इससे पहले बसपा में रह चुके हैं। अरविंद मौर्य की यह विधानसभा चुनाव की पहली पारी है। जिले की सदरविधानसभा सीट भाजपा के लिए एक अबूझ पहेली बनी हुई है। आजादी के बाद से कई प्रयोगों के बावजूद यहां एक बार भी भाजपा को जीत नहीं मिल सकी है। इस विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं ने सबका यानी सपा, बसपा और कांग्रेस को भी मौका दिया है, लेकिन भाजपा को हमेशा ही निराशा ही मिली है। दरअसल यह क्षेत्र सपा का गढ़ माना जाता रहा है। इस लिहाज से अरविंद कुमार मौर्य के लिये यहां से चुनौती कम नहीं होने वाली है। हालांकि सदर विधानसभा क्षेत्र से अरविंद मौर्या को टिकट देकर भाजपा ने पिछड़ी जातियों को साधने की कोशिश की है।

बैजनाथ रावत का कटा टिकट, दिनेश को बनाया प्रत्याशी
वहीं बाराबंकी की हैदरगढ़ विधानसभा सीट (Haidergarh Vidhan Sabha Seat) से भाजपा ने ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि दिनेश रावत (Dinesh Rawat) को मौका दिया है। दिनेश रावत की भी विधानसभा चुनाव की यह पहली पारी है। हैदरगढ़ से टिकट पाने वाले दिनेश रावत की पत्नी आरती रावत सिद्धौर से ब्लाक प्रमुख हैं। वहीं भाजपा ने इस बार हैदरगढ़ विधानसभा सीट से अपने वर्तमान विधायक बैजनाथ रावत का टिकट काटकर दिनेश रावत को उम्मीदवार बनाया है। अंदाजा लगाया जा रहा है कि बैजनाथ रावत का टिकट कटने में उनकी उम्र का फैक्टर हावी हो गया। जबकि कुछ लोगों का कहना है कि विधायक बैजनाथ रावत का उनके विधानसभा क्षेत्र में काफी विरोध था, इसलिये बीजेपी आलाकमान ने उनका टिकट यहां से काटा है।

अमरीश रावत फिर मैदान में
वहीं बाराबंकी की जैदपुर सुरक्षित विधानसभा सीट (Zaidpur Vidhan Sabha Seat) से भारतीय जनता पार्टी के बाराबंकी से वर्तमान सांसद उपेंद्र सिंह रावत (BJP MP Upendra Singh Rawat) 2017 में चुनाव जीता था और विधायक बने थे। 2019 के लोकसभा चुनाव में वह भाजपा के टिकट पर सांसद चुने गए। जिसके बाद हुए उपचुनाव में भाजपा अपनी सीट नहीं बचा सकी। यहां से भाजपा उम्मीदवार अमरीश रावत (Amrish Rawat) को उप चुनाव में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार गौरव रावत से हार का सामना करना पड़ा। हालांकि इस बार भी अमरीश रावत को अपने चिर परिचित प्रतिद्वंदी सपा के कैंडिडेट के साथ कांग्रेस के तनुज पुनिया और दूसरे उम्मीदवारों का सामना करना होगा। ऐसे में जैदपुर सीट से उनके लिये बीजेपी का कमल खिलाना इतना आसान नहीं होने वाला है।