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यूपी की इस विधानसभा सीट पर लगातार दो बार चुनाव नहीं जीती कोई पार्टी, क्या इस बार इतिहास बदल पाएगी भाजपा?

बाराबंकी. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 (UP Vidhan Sabha Election 2022) को लेकर सभी राजनीतिक इन दिनों सरकार बनाने के लिये रणनीति बनाने में जुटे हैं। कोई नेता दल बदल रहा है, तो कोई अपनी विधानसभा सीट बदलकर अपनी किस्मत चमकाने में लगा है। इस विधानसभा चुनाव चुनाव में खास नजरें उन सीटों पर भी रहेंगी जहां हर बार जनता का मूड बदला और पार्टी का विधायक भी बदल गया। कुछ ऐसा ही इतिहात बाराबंकी जिले की रामनगर विधानसभा सीट (Ramnagar Vidhan Sabha Seat) का भी रहा है। रामनगर सीट का इतिहास रहा है कि यहां जनता ने कभी किसी विधायक को दूसरी बार नहीं चुना। रामनगर विधानसभा क्षेत्र की सीमा बहराइच, गोंडा और सीतापुर जिले से भी मिलती है। मौजूदा समय में यहां से भाजपा के शरद कुमार अवस्थी विधायक (BJP MLA Sharad Kumar Awasthi) हैं। ऐसे में 2022 में बीजेपी के सामने एक बड़ी चुनौती है, वो अपने प्रत्याशी की दोबारा जीत दर्ज करवा सके।


एक नजर में रामनगर विधानसभा सीट
दरअसल बाराबंकी की रामनगर विधानसभा सीट से जिसको भी एक बार जीत मिली वह दोबारा जीत नहीं सका है। इसी लिये बाराबंकी की इस विधानसभा सीट को उत्तर प्रदेश की हॉट सीटों की सूची में भी शामिल भी किया गया है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि इस बार भी इस सीट पर जनता इतिहास दोहरती है, या फिर कोई नया रिकॉर्ड बनाती है। दरअसल बाराबंकी में घाघरा नदी के किनारे बसी रामनगर विधानसभा सीट का अपना आध्यात्मिक महत्व भी है। यहां महाभारत काल की कई निशानियां भी मौजूद हैं जो इलाके को एक अलग पहचान दिलाती हैं। यहां महाभारत काल का प्रसिद्ध लोध्श्वर महादेवा मंदिर (Lodheshwar Mahadeva Mandir), पांच हजार साल पुराना पारिजात का वृक्ष (Parijat Tree), किंतूर गांव मे माता कुंती का कुंतेश्वर मंदिर (Kunteshwar Temple) है। इसके अलावा यहां के किंतूर गांव में ही ईरान के सुप्रीम लीडर रहे अयातुल्लाह रूहुल्लाह खुमैनी (Ayatollah Ruhollah Khomeini) के पूर्वजों की जन्मस्थली भी है। खुमैनी के परिजन किंतूर से ही ईरान (Iran) गए थे। यह भूमि कई सूफी संतों और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की कर्म भूमि भी रही है। इसके अलावा हर साल घाघरा नदी (Ghaghara River) में आई बाढ़ तराई में तबाही भी मचाती है।

जानें यहां का राजनीतिक इतिहास
रामनगर विधानसभा सीट के सियासी इतिहास की अगर बात करें तो यहां भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), समाजवादी पार्टी (सपा), कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) हर दल की मजबूत पकड़ रही है। सभी पार्टियों के विधायक यहां से जीतकर यूपी विधानसभा पहुंच चुके हैं। इस विधानसभा सीट से साल 2007 में बसपा के उम्मीदवार को जीत मिली थी, तो वहीं 2012 के चुनाव में सपा के अरविंद सिंह गोप निर्वाचित होकर विधानसभा पहुंचे थे। अरविंद सिंह गोप अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में भी सपा ने अपने निवर्तमान विधायक अरविंद सिंह गोप पर ही भरोसा जताया तो वहीं बीजेपी ने शरद अवस्थी को मैदान में उतारा। बीजेपी उम्मीदवार शरद अवस्थी ने सपा के उम्मीदवार अरविंद सिंह गोप को 22 हजार वोट से अधिक के बड़े अंतर से हरा दिया था। ऐसे में 2022 में बीजेपी के सामने एक बड़ी चुनौती है, वो अपने प्रत्याशी की दोबारा जीत दर्ज करवा सके।


रामनगर विधानसभा सीट का सामाजिक ताना-बाना

  • रामनगर विधानसभा सीट पर करीब तीन लाख मतदाता
  • पुरुष मतदाता- 164437 महिला मतदाता- 132662
  • ये विधानसभा सीट मुस्लिम और दलित बाहुल्य
  • ठाकुर और ब्राह्मण मतदाता निभाते हैं निर्णायक भूमिका
  • अन्य पिछड़ी जाति के मतदाताओं की तादाद भी अच्छी खासी