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बृजेश पाठक जी! आपके जाने के बाद तो और ज्यादा बीमार हो गया ये अस्पताल, मरीजों को ‘भगवान’ क्या इंसान भी नहीं समझ रहे डाक्टर

बाराबंकी. Barabanki District Hospital Reality Check: करीब दस दिनों पहले उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक (Brajesh Pathak) ने बाराबंकी जिला चिकित्सालय का औचक निरीक्षण किया था। डिप्टी सीएम यहां मरीज बनकर ओपीडी में पहुंचे और लाइन में लगकर पर्चा बनवाया। मास्क लगा होने के कारण पहले तो लोग उनको पहचान नहीं पाए, लेकिन जब पता चला तो वहां पर खलबली मच गई थी। करीब 40 मिनट के निरीक्षण के दौरान बृजेश पाठक ने यहां पर कई कमियां मिलने के बाद जिम्मेदार चिकित्सों और अधिकारियों को फटकार भी लगाई थी और सारी व्यवस्था को जल्द से जल्द दुरुस्त कराने के कड़े निर्देश दिये थे। जिसके बाद एक उम्मीद जगी थी कि शायद अब यहां की व्यवस्थाएं अब कुछ दुरुस्त हो जायें। लेकिन आज यहां के रियलिटी चेक में जो तस्वीर सामने आई, वह काफी निराश करने वाली है। आलम ये है कि यहां की हालत डिप्टी सीएम के निरीक्षण के बाद से और ज्यादा बद्तर हो गई है।


बाराबंकी का बीमार जिला अस्पताल
बाराबंकी जिला चिकित्सालय में इलाज कराने आये मरीजों को धक्के खाना पड़ रहा है। उप मुख्यमंत्री और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री के औचक निरीक्षण के बाद भी यहां की व्यवस्था में कोई सुधार नहीं दिखा। सुबह 8 बजे से ही बाहर गेट से लेकर डाक्टरों के कक्ष तक मरीजों की भयंकर भीड़ गुत्थमगुत्था कर रही थी। वार्डों तक पेयजल तो छोड़िये पेजयल के लिये लगे नलों से पानी नहीं आ रहा था। पानी का इंतजाम नहीं होने से तीमारदारों को बोतल में पानी लेकर जाना पड़ रहा है। वहीं इस जिला अस्पताल के सर्वेसर्वा यहां के सीएमएस ही 9 बजे तक अस्पताल में कहीं नजर नहीं आये। वह अपने कमरे से भी नदारद थे। लेकिन उनके कमरे से सारे पंखे, लाइट और एसी धड़ाके के चल रहे थे। अब वह किसके लिये चल रहे थे और सीएमएस साहब कहां नदारद हैं, इसका कोई जवाब नहीं दे पाया। हालांकि लोगों ने यह जरूर बताया कि जिला अस्पताल के सीएमएस डा. बृजेश सिंह कभी भी अस्पताल में नहीं मिलते और अगर कमरे में होते भी हैं तो लोगों से मिलने से साफ इनकार कर देते हैं। उनका रवैया मरीजों और आम लोगों के प्रति काफी खराब है।

धक्कामार एंबुलेंस, कैसे लायेगी मरीज
यहां मरीजों को लाने वाली एंबुलेंस भी डग्गामार की हालत में खड़ी मिलीं। जिसे स्टार्ट कराने के लिये पांच से छह लोगों को कई बार धक्का लगाना पड़ता है। तब जाकर एंबुलेंस मरीजों को लाने के लिये स्टार्ट होती है। हड्डी के डाक्टर वीके चौधरी हमेशा की तरह नशे में चूर होकर झूमते नजर आये। उनसे जब पूछा गया कि आप नशे में हैं तो वह वहां से भाग खड़े हुए। वहींं मरीजों से पता चला कि प्लास्टर बांधने और काटने का काम डाक्र साबह ने वहां के स्वीपर को थमा रखा है। अस्पताल के दंत विभाग के डाक्टर भी कमरे से नदारद मिले। लेकिन उनके विभाग के सारे पंखे और एसी चलते मिले। वहीं अस्पताल के नेत्र विभाग समेत कई विभागों में डाक्टरों के साथ दलाल भी बैठे मिले। जो मरीज को बाहर दिखवाने और ऑपरेशन करवाने का सौदा कर रहे थे।

इमरजेंसी का और बुरा हाल
वहीं बात अगर अस्पताल की इमरजेंसी की करें तो वहां की हालत तो और भी ज्यादा बुरी मिली। मरीज स्ट्रेचर पर पड़े जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे थे, लेकिन उनको देखने वाला कोई डाक्टर नहीं दिखा। एक नवजात बच्चे के तीमारदार खुद ग्लूकोज की बोतल हाथ में लेकर टहल रहे थे। उनका कहना था कि उसे लगाने वाला कोई नहीं मिल रहा। एक स्ट्रेचर पर चोट खाया गंभीर हालत में एक मरीज पड़ा था। उसके तीमारदार इलाज के लिये डाक्टरों से गुहार लगा रहे थे, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं था। यानी कुल मिलाकर आज के रियलिटी चेक में जो तस्वीर सामने आई, वह काफी निराश करने वाली है। आलम ये है कि यहां की हालत डिप्टी सीएम के निरीक्षण के बाद से और ज्यादा बद्तर हो गई है।