Saturday , January 28 2023

हमारे इतिहास को गलत तरीके से पेश किया गया: ललित बिहारी गोस्वामी

लखनऊ. संस्कृति शिक्षा संस्थान कुरुक्षेत्र के अध्यक्ष ललित बिहारी गोस्वामी ने आज़ादी के अमृत महोत्सव पर आयोजित राष्ट्रहित सर्वोपरि कार्यक्रम के पांचवे अंक में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि हमारे देश के लिए कई बलिदानियों ने अपने प्राणों की आहुति दी, लेकिन इतिहास बनाने वालों के साथ इतिहास लिखने वालों ने न्याय नहीं किया। इतिहास को गलत तरीके से तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया, जो इतिहास लिखा गया वो एकांगी है। वास्तव में अब आज़ादी का असली मतलब समझ आ रहा है। इससे पहले 2014 तक अंग्रेजों का देश में एक्सटेंशन था। उसी प्रकार की शिक्षा, संस्कृति और विश्वविद्यालय रहे, लेकिन अब चीजें बदलनी शुरू हुई हैं।

मुख्य वक्ता संस्कृति शिक्षा संस्थान कुरुक्षेत्र के अध्यक्ष ललित बिहारी गोस्वामी ने वीर सेनानियों को प्रणाम करते हुए उनकी वीर गाथाओं से परिचय कराया। उन्होंने कहा कि हमारा परिचय अमृत पुत्र के रूप में हैं, जो मरता नहीं हैं। हमारे यहां केवल शरीर नहीं है आत्मा भी है, जो नाशवान नहीं होती है। उन्होंने कहा कि हम सबके भीतर ये अमरत्व हमारी सेना और सेना नायकों की वजह से है, जो कठिन परिश्रम के साथ हमारी रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं और कई बार हमारी रक्षा के लिए शहीद भी हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे देश के लिए जिन वीरों ने कष्ट सहा है, उनके बारे में कक्षाओं में पढ़ाना चाहिए और जन सामान्य तक उनके संघर्ष की गाथाओं को पहुंचाना चाहिए।


मुख्य अतिथि लेफ्टिनेंट कर्नल आदित्य प्रताप सिंह (मेंशन इन डिस्पैच अवार्ड से सम्मानित) ने कहा कि 2014 के बाद लोगों के अंदर नई सोच विकिसत हुई। हम सभी में इतिहास बोध और समझ कम थी। उन्होंने कहा कि किसी देश व राष्ट्र को चलाने के लिए कुशल नेतृत्व की आवश्यकता होती है, पहले इसका अभाव था। इसलिए हमारे हाथ से गिलिगिट-बाल्टिस्तान हमारे हाथ से चला गया। उन्होंने कहा कि असली लड़ाई 1947 व 1948 में लड़ी गई, इसके बारे में बहुत कम बताया गया है। हमें ऐसे सेनानियों, क्रांतिकारियों की वीर गाथाओं से नई पीढ़ी को अवगत कराना है ताकि नए भारत की संकल्पना को साकार किया जा सके।


कार्यक्रम अध्यक्ष विश्व हिन्दू परिषद नेपाल के संगठन मंत्री श्री प्रह्लाद जी ने कहा कि राजनीतिक तौर पर भले ही भारत और नेपाल अलग हैं, लेकिन हिन्दू राष्ट्र के स्वरूप में दोनों एक हैं, दोनों की संस्कृति एक है। उन्होंने नेपाल और अंग्रेजों के बीच संघर्ष के बारे में बताया और कहा कि उस समय नेपाल के सभी क्षेत्रों ने एकजुट होकर मुक़ाबला किया और अंग्रेजों को झुकने पर मजबूर किया। उन्होंने कहा कि भले ही भारत और नेपाल अलग-अलग देश हों, लेकिन दोनों देश के बीच हिन्दुत्व और मातृत्व की भावना एक है।