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Attack Movie Review- John Abraham और एक्शन, कमजोर स्टोरी की करते हैं भरपाई, भारत की पहली super soldier film नहीं है खराब कोशिश

दिल्ली. Attack Movie Review. अटैक फिल्म के ट्रेलर लॉन्च से ही काफी बज था। “ये नया बॉलीवुड है और Universal Soldier, Terminator, Robocop जैसी फिल्म को टक्कर देने वाला भारत का अपना सुपर सोल्जर आ गया है”, जैसी बातें हम कर रहे थे और हमारी उम्मीदें आसमान छू गई थीं, खासतौर पर पिछले हफ्ते रिलीज हुई आरआरआर के बाद (जो दूसरे हफ्ते भी धमाल मचा रही है)। तो क्या जॉन अब्राहम की अटैक हमारे दिलों में घर करती है या पहली तारीख को अप्रैल फूल बनाया गया है? आईये जानते हैं।

फिल्म की कहeनी की गति काफी तेज है। ओपनिंग सीन में ही अर्जुन शेरगिल (John Abraham) के किरदार से फिल्म का उद्देश्य साफ हो जाता है। मतलब फिल्म देखने आए हैं, तो ज्यादा दिमाग लगाने की जरूरत नहीं, लगाएंगे तो संतुष्ट नहीं होंगे। अर्जुन एक टेररिस्ट को पकड़ने अपनी टीम संग निकला है और आसानी से बॉम्ब डिफ्यूज करते हुए उसे पकड़ भी लेता है। हालांकि बाद में उसे उसका खामियाजा भी भुगतना पड़ता है। फिल्म के शुरुआती 15 मिनट में ही अर्जुन की जिंदगी को बदल देने वाला हादसा हो जाता है, जिसे आप ट्रेलर से ही जान गए होंगे। और फिर होती है विज्ञान की एंट्री, जो अर्जुन को एक आम सैनिक से सुपर सोल्जर बना देती है। अब ये सुपर सोल्जर देश की रक्षा कैसे करता है? फिल्म अटैक इसका जवाब देती है।

फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी है, इसकी कहानी, जिसे गहराई से गढ़ने में ज्यादा समय नहीं दिया गया है। कहानी देखी-देखी सी लगती है, मतलब कुछ नया नही हैं। लॉजिक्स की सैकड़ो जगह कमी हैं। फिल्म पूरी तरह John Abraham के सुपर सोल्जर अवतार को स्थापित करने पर केंद्रित। इसलिए बाकी चीजों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया है। रोमांस का तड़का भी इसलिए हल्का फुल्का ही रखा गया है। और ऐसा नहीं कि Jacqueline Fernandez के साथ दूसरी अभिनेत्री Rakul Preet हैं, तो John दोनों के साथ रोमांस करते हैं। फिल्म की घटनाएं तेजी से घटती हैं। चाहे वो John Abraham का ट्रांरफोर्मेशन हो, संसद भवन पर अटैक या फिर रेस्क्यू मिशन। सब कुछ बुलेट की स्पीड से घटता चला जाता है। और तर्क इसलिए हवा हवाई भी हो जाते हैं। वीएफएक्स के भी बेहतर होने की काफी गुंजाइश थी, लेकिन इन सभी खामियों के बावजूद Attack पहली सुपर सोल्जर फिल्म के रूप में खराब कोशिश नहीं है। इस फैक्ट की भी सराहना करनी चाहिए कि फिल्म निर्देशक Lakshya Raj Anand की यह पहली फिल्म है, जो पहली कोशिश में पूरी तरह नाकाम नहीं हुए हैं। Hollywood की कई सुपरहीरो और सुपरसोल्जर फिल्मों को हम देख चुके हैं। इसलिए हमारी उम्मीदें उससे कुछ बेहतर देखने की ही होती है। लेकिन वह सब भी काल्पनिक हैं। Olympus Has Fallen और London Has Fallen जैसे फिल्मों में भी केवल एक नायक ही प्रेसिंडेट को बचा लेता है। तमाम खामियों के बावजूद हम यदि उसे पसंद करते हैं, तो Bollywood की इस कोशिश को पूरी तरह नाकाम कहना ठीक नहीं होगा।

अभिनय की बात करें, तो John Abraham फिल्म के संटर में भी हैं, और राइट लेफ्ट में भी। उनकी इतनी एक्शन फिल्में आ चुकी हैं कि उन्हें देख कर यही लगता है कि वो अपने हाथों से पहाड़ भी तोड़ देंगे। फिल्म में उनका किरदार कुछ ऐसा ही हैं। Super Soldier के लिए वो सबसे फिट एक्टर हैं। जैक्लीन फर्नानडीज का रोल कम है, लेकिन फिल्म की कहानी की वो एक मबजूत कड़ी भी है। और जब-जब वो स्क्रीन पर आती हैं, तो फिल्म में एक इमोश्नल कनेक्ट भी जुड़ता है, हालांकि दूसरे ही पल वो टूट भी जाता है। राकुल प्रीत भी अपने वैज्ञानिक के रोल के साथ इंसाफ करती हैं। सुब्रमनयम के रोल में Prakash Raj की एक्टिंग भी हमेशा की तरह शानदार है।

The NH zero की ओर से फिल्म को दिए जाते हैं तीन स्टार्स। स्वागत और सपोर्ट करिए भारत की first super soldier based film का। कम उम्मीद के साथ फिल्म को देखने जाइये। John Abraham और फिल्म के एक्शन का लुफ्त उठाइये।