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असदुद्दीन ओवैसी बीजेपी से ज्यादा लोकतांत्रिक हैं? Sawal to Banta Hai…

लखनऊ. Sawal to Banta Hai– मुस्लिम नुमाइंदगी की बात करने वाले असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने अब तक करीब 20 फीसदी हिंदुओं को टिकट दिया है, जबकि ‘सबका साथ, सबका विकास’ का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी ने इस बार भी किसी मुस्लिम को चुनाव मैदान में नहीं उतारा है। ऐसे में सवाल तो बनता है..? कि क्या असदुद्दीन ओवैसी भाजपा से ज्यादा लोकतांत्रिक हैं? सवाल नंबर दो- क्या भाजपा को मुस्लिम वोटों से परहेज है या फिर मुसलमान कैंडिडेट से? या फिर पूरी कोशिश ध्रुवीकरण के हथियार को और धार देने की है?

असदुद्दीन ओवैसी की छवि आमतौर पर कट्टरवादी सोच वाले मुसलमान के तौर पर पेश की जाती है, लेकिन खुद भाजपाई भी ऐसा नहीं मानते। बीजेपी के दिग्गज नेता व सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी का कहना है कि ओवैसी भले ही राष्ट्रवादी नहीं हैं, लेकिन वो देशभक्त हैं। पांच राज्यों, खासकर यूपी में चुनाव प्रचार के दौरान जब बड़ी पार्टियों के बड़े नेता जिन्ना-पाकिस्तान का जिक्र कर रहे हैं, ओवैसी का स्टैंड क्लियर है। वह कहते हैं कि यूपी को जिन्ना नहीं, बल्कि गन्ने की कीमत की जरूरत है। वह कहते हैं कि भारत के मुसलमान को जिन्ना से क्या करना, जो जिन्ना को मानने वाले थे वो पाकिस्तान चले गए।

क्या असदुद्दीन ओवैसी भाजपा से ज्यादा लोकतांत्रिक हैं? इस सवाल पर क्या कहते हैं एआईएमआईएम के सदस्य प्रदेश कार्यकारणी प्रभारी सलमान— ऑडियो सुनें

क्या मुसलमान भाजपा को वाकई में वोट नहीं करते?
कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि मुसलमान भाजपा को वोट नहीं करते फिर भी पार्टी उनका ख्याल रखती है। ऐसे में सवाल तो बनता है… कि क्या मुसलमान भाजपा को वाकई में वोट नहीं करते? आइए इसे समझ लेते हैं-

पिछले चुनावों के नतीजे बताते हैं कि बीजेपी को मुस्लिमों का भी वोट मिलता है। सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसायटी यानी सीएसडीएस के 2014 के चुनावों के बाद के आंकड़ों के मुताबिक 2014 के लोकसभा चुनावों में यूपी के करीब 10 फीसदी मुसलमानों ने बीजेपी को वोट दिया था। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर इसी चुनाव में करीब 8.5 फीसदी मुसलमानों ने बीजेपी को वोट दिया था। ये पहला ऐसा चुनाव था जिसमें बीजेपी को मुसलमानों का इतना बड़ा समर्थन हासिल हुआ था।

सीएसडीएस की रिपोर्ट
सीएसडीएस के मुताबिक, राष्ट्रीय स्तर पर 2009 में बीजेपी को तीन फीसदी मुस्लिमों ने वोट किया था। 2014 से पहले बीजेपी को सबसे ज्यादा 7 फीसदी मुस्लिमों का सपोर्ट 2004 में मिला था। 1998 में 5 और 1999 में 6 फीसदी मुस्लिम वोट बीजेपी के साथ था। हालांकि सच यह भी है कि 2014 में राष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा 37.6 मुस्लिम वोट कांग्रेस को मिला था जबकि यूपी में 58 फीसदी मुस्लिमों ने सपा पर भरोसा जताया था।

वे कौन मुसलमान हैं जो बीजेपी को करते हैं वोट?
सीएसडीएस के निदेशक संजय कुमार कहते हैं कि पिछले तीन-चार इलेक्शन में भाजपा को सात परसेंट वोट मिलता रहा है। ऐसे में सवाल तो यह भी बनता है…कि आखिर ये कौन मुस्लिम मतदाता हैं जो आम धारणा से हटकर बीजेपी को वोट करते हैं? राजनीतिक विश्लेषकों की इस पर अलग-अलग राय है। कोई कहता है कि कुछ मुसलमान मतदाता जीत के रुख पर वोट करते हैं। किसी का मानना है कि यह प्रत्याशी के व्यक्तिगत व्यवहार पर निर्भर करता है। कुछ दूसरे प्रत्याशियों से नाराजगी की वजह करार देते हैं।

मुस्लिम वोट चाहिए पर कैंडिडेट से परहेज क्यों?
सवाल तो यह भी बनता है… कि क्या बीजेपी को सच में मुस्लिम मतदाताओं के वोट चाहिए। अगर हां तो फिर कैंडिडेट से परहेज क्यों? क्योंकि जब आप भागीदारी देंगे तभी थो उनका वोट मिलेगा।

2014 व 2019 के लोकसभा चुनाव हों या फिर 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव, बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में किसी भी मुस्लिम कैंडिडेट को टिकट नहीं दिया है। इस बार भी पश्चिमी के दो चरणों की 113 सीटों पर विपक्षी दलों ने मुस्लिमों पर बड़ा दांव लगाया है, लेकिन बीजेपी ने एक भी टिकट नहीं दिया। वेस्ट यूपी की 113 विधानसभा सीटों पर 127 मुस्लिम कैंडिडेट चुनाव मैदान में हैं। इनमें पहले चरण में 50 तो दूसरे चरण में 77 मुस्लिम उम्मीदवार चुनावी रण में हैं।

मुस्लिमों का हाल
देश में 17.22 करोड़ मुस्लिम हैं, यूपी में इनकी संख्या करीब 20 फीसदी है। लेकिन यहां एक भी सांसद मुसलमान नहीं है। विधायकों की संख्या जरूर 23 है। 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा ने भले ही किसी मुसलमान को टिकट नहीं दिया था, लेकिन मोहसिन रजा को एमएलसी बनाकर राज्यमंत्री जरूर बनाया था।

10 मार्च को पता चलेगा रिजल्ट
बीजेपी के अलावा इस बार सभी दलों ने मुस्लिमों को खूब टिकट बांटे हैं और सभी अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं। ऐसे में सवाल तो बनता है…? कि इस बार मुस्लिम मतदाता किसी एक दल को वोट करेंगे या फिर बंटवारा होगा… फिलहाल, इसका पुख्ता खुलासा 10 मार्च ही हो पाएगा जब चुनावी नतीजे आएंगे।