Tuesday , February 7 2023

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की सलाह- जीतना है तो आजम खान के नेतृत्व में चुनाव लड़ें अखिलेश यादव, विपक्षी दलों की भूमिका पर उठाये सवाल

लखनऊ. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एमपीएलबीआई) ने सपा, बसपा और कांग्रेस सहित विपक्षी दलों पर जमकर निशाना साधा। रविवार को जारी प्रेसनोट में एमपीएलबीआई ने कहा कि मुस्लिम समुदाय कि समस्याओं व उत्पीड़न पर विपक्षी दल मौन रहकर जाने या अनजाने में फांसीवादी ताकतों को हौसला दे रहे हैं। वर्तमान में देश की संवैधानिक व्यवस्था व लोकतंत्र खतते के निशान के पास है, बावजूद हमारे पूरे वोट लेने वाले विपक्षी दल मौन क्यों हैं? खासकर उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी को न तो हमारे समुदाय की चिंता है और न खत्म होते लोकतंत्र की। एमपीएलबीआई ने कहा हमारा वोट लेकर भी कभी बसपा सुप्रीमो तो कभी सपा सुप्रीमो अपनी पराजय का ठीकरा हमारे समुदाय पर फोड़ते हैं, जबकि नेतृत्व व रणनीति में यह पार्टियां हमारे समुदाय के अपने ही नेताओं को सहभागी नहीं बनातीं।

एमपीएलबीआई के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. मोइन अहमद खान ने कहा कि हमारे वोट पाकर सदन में बैठे लोग ट्रिपल तलाक, सीएए, एनआरसी जैसे कानूनों के विरोध में भी मुखर नहीं हुए। अब जब भाजपा 1991 के धर्मस्थल अधिनियम व वक्फ अधिनियम को खत्म करने में लगी हो तो भी विपक्षी दल क्यों मौन हैं?

आजम खान के नेतृत्व में चुनाव लड़ें अखिलेश यादव: एमपीएलबीआई
डॉ. मोइन अहमद खान ने कहा कि सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव लगातार अपने नेतृत्व में चुनाव हार रहे हैं और बसपा सुप्रीमो मायावती की भी यही स्थिति है। अखिलेश यादव को सलाह देते कहा कि उन्हें अब आजम खान जैसे कद्दावर नेता को पार्टी का नेतृत्व सौंपकर सड़क उतरना चाहिए। क्योंकि, जब संविधान व लोकतंत्र ही नहीं रहेगा तो विपक्षी दलों की भूमिका भी समाप्त हो जाएगी। रविवार को अखिलेश यादव ने राष्ट्रीय संगठन व प्रदेश अध्यक्ष को छोड़कर समाजवादी पार्टी की सभी इकाइयां भंग कर दी हैं।

विपक्षी दलों के जवाब के इंतजार में एमपीएलबीआई
बोर्ड महासचिव ने कहा कि संविधान व लोकतंत्र खतरे में है। लेकिन, सपा, बसपा व कांग्रेस अपनी भूमिका का नैतिकता के साथ निर्वहन नहीं करते तो फिर जनता को सड़कों पर उतरना उसकी विवशता होगी। इसके लिये बोर्ड राष्ट्रीय स्तर पर रणनीति बनाने का प्रयास करने के साथ ही सामाजिक संगठनों को लामबंद करेगा। उन्होंने कहा कि बोर्ड इस इस सम्बन्ध में भाजपा को छोड़कर सभी राजीतिक दलों को पत्र लिखने के साथ उनके जवाब का इंतज़ार करेगा। सकारात्मक उत्तर नहीं मिलने पर आगे की रणनीति पर अमल में लाई जाएगी।