Tuesday , February 7 2023

यूपी उपचुनाव में अखिलेश-जयंत का मास्टर स्ट्रोक, नजर 2024 के लोकसभा चुनाव पर

लखनऊ. पांच दिसंबर को उत्तर प्रदेश की एक लोकसभा और दो विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है। इस उपचुनाव के जरिए 2024 के लोकसभा चुनाव की बिसात बिछाई जा रही है। भारतीय जनता पार्टी की कोशिश सपा के गढ़ में कमल खिलाने की है तो अखिलेश यादव और जयंत चौधरी की जोड़ी ने एक नया समीकरण बना दिया है जो आगामी लोकसभा चुनाव में बीजेपी ही नहीं बहुजन समाज पार्टी का भी खेल बिगाड़ सकता है। खतौली विधानसभा सीट पर सपा-रालोद गठबंधन में अब आजाद पार्टी के चंद्रशेखर भी शामिल हो गये हैं। खतौली में रालोद ने जाट-गुर्जर और मुस्लिमों का जो फार्मूला अपनाया है, आजाद समाज पार्टी के सहारे उसे किले में तब्दील करने की कोशिश की जा रही है।

सपा-रालोद गठबंधन के साथ चंद्रशेखर का आना, यूपी में नये सियासी समीकरण के तौर पर देखा जा रहा है। 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले भी इसकी चर्चा खूब थी, लेकिन आखिर में बात नहीं बनी। लेकिन, अब वह मैनपुरी, रामपुर और खतौली उपचुनाव में सपा गठबंधन के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो 2024 में अगर यह गठबंधन बरकरार रहा तो वेस्ट यूपी में बीजेपी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इतना ही नहीं बसपा का खेमा भी इस नये समीकरण से बेचैनी महसूस कर रहा होगा।

वेस्ट यूपी का कुरुक्षेत्र बना खतौली
मुजफ्फरनगर जिले की खतौली विधानसभा सीट पश्चिमी यूपी की सियासत का कुरुक्षेत्र बनी है। बीजेपी के विजयरथ को रोकने के लिए रालोद ने यहां मदन भैया को मैदान में उतारा है। अब आजाद समाज पार्टी ने भी इस गठबंधन में शामिल को भी इस गठबंधन के शामिल कर नए समीकरण की शुरुआत की है। खतौली के रण में गठबंधन प्रत्याशी को जितान के लिए जयंत चौधरी और चंद्रशेखर एक मंच पर दिखे। जयंत के भाषण ने ये साफ भी किया कि खतौली से दिल्ली पर निशाना लगाना है। इस दौरान आसपा के मुखिया चंद्रशेखर ने बीजेपी पर जमकर निशाना साधा। कहाकि खतौली का उपचुनाव बीजेपी के अहंकार के ताबूत में आखिरी कील ठोकने का काम करेगा। चंद्रशेखर आजाद ने 2 अप्रैल की घटना, हाथरस की घटना और किसान आंदोलन में मारे गए किसानों का जिक्र कर सियासी पारा और चढ़ा दिया।